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August 11, 2023, 1:30 pm
KHABAR : उदारता बिना जीवन का विकास नहीं होता है, चातुर्मास धर्म सभा में स्वामी सत्यानंद सरस्वती महाराज ने दिए उपदेश, पढ़े खबर

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नीमच। मनुष्य को विनम्र और उदार भाव से जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।  क्रोध पर नियंत्रण किए बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है। उदारता बिना जीवन का विकास नहीं होता है।
यह बात स्वामी सत्यानंद सरस्वती महाराज ने कही। वे ग्वालटोली श्री राधा कृष्ण मंदिर में चंद्रवंशी ग्वाला समाज के मार्गदर्शन में कथा श्रीमद् भागवत सेवा समिति की उपस्थिति में आयोजित श्री राम कथा चातुर्मास धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बाहर के दुश्मन से तो मनुष्य सावधान रह सकता है लेकिन भीतर के दुश्मन से व्यक्ति नहीं बच सकता है। इसलिए अंतरात्मा के क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। मंथरा अयोध्या के महल के अंदर रहती थी। पुतना, ताड़का महल के बाहर रहती थी। श्री राम ने बाहर के दुश्मन तड़का को तो जीत लिया था लेकिन भीतर के दुश्मन मंथरा से नहीं जीत पाए थे।क्रोध क्षणिक आता है 24 घंटे मन में नहीं रहता है। क्रोध आने पर पता चल जाता है तो मनुष्य को सावधानी पूर्वक क्रोध पर नियंत्रण कर लेना चाहिए।लोभ कभी-कभी आता है लेकिन मन में 24 घंटे रहता है ।निस्वार्थ भाव से रहना चाहिए और लोभ नहीं करना चाहिए। कामवासना कभी-कभी आती है वह बाहर से आती है।मित्र के साथ अच्छा व्यवहार करना श्री राम के जीवन चरित्र से सीखना चाहिए। पिताजी शब्द में प्रेम भाव रहता है लेकिन राजा शब्द में अहंकार रहता है। राम ब्रह्मांड के राजा थे।वे अयोध्या के राजा की बात नहीं सुन सकते थे। पिता की आज्ञा अवश्य मानते थे। श्रीराम ने बचपन से ही गुरु वशिष्ट से भलाई के संस्कार सीखे और अपने जीवन को मर्यादा मान बनाकर संसार में आदर्श स्थापित किया। धर्म सभा में   भजन गायिका बुद्धि माया प. कैलाश शर्मा ,प्रभा बैरागी ने कराओके ट्रैक पर संगीतमय मधुर कर्णप्रिय आरती एवं भजन प्रस्तुत किए।
दिव्य सत्संग चातुर्मास धर्म सभा सत्संग समारोह के मुख्य संकल्प कर्ता पप्पू हलवाई, श्रीमद भागवत उत्सव समिति के सदस्य हरगोविंद दीवान,गोपाल चंद्रवंशी ने बताया कि प्रतिदिन दिव्य चातुर्मास सत्संग का समय रात्रि 8रू30 से 10 बजें रहेगा। निर्धारित समय पर उपस्थित होकर धर्म ज्ञान का लाभ ग्रहण करें।आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

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