रतलाम। चातुर्मासिक प्रवचन शृंखला में गुरुवार को आचार्यश्री कुलबोधि सूरीश्वर महाराज ने मोहन टॉकीज में पुण्य पर प्रकाश डालते हुए कहा। आचार्य श्री ने कहा कि आदमी धरती पर बैठकर सिर्फ पैसा गिनता है, ऊपर ईश्वर सांस गिनता है। कल कितनी सांस थी और आज कितनी है। वक्त बहुत थोड़ा है और काम बहुत बाकी है, इसलिए जो करना है आज कर लो क्योंकि कल किसने देखा? तुमको पता नहीं सांस कितनी बाकी है।
मंदिर पर लगी ध्वज को कौन सी दिशा में फिरना है, यह वह खुद तय नहीं कर सकती, उसे हवा तय करती है। हमारे जीवन की दिशा भी इसी तरह पुण्य पर टिकी है। जीवन है, तो पुण्य है। अन्यथा पुण्य की भी एक्सपायरी आएगी
महाराजश्री ने कहा कि मन का भरोसा नहीं, पुण्य जिंदगी भर साथ दे सकता है लेकिन मन 10 मिनट भी साथ नहीं देता। जूते, कपड़े, मकान कहां रखना है यह हमें पता है लेकिन मन कैसे रखना यह किसी को नहीं पता। यदि यह साथ रहेगा तो साधना नहीं कर पाओगे। प्रवचन के दौरान देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, ऋषभदेव केशरीमल जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।