भोपाल। नगर निगम की विधि शाखा में कानूनविदों की फौज है, लेकिन यहां एक हजार 200 से अधिक मामले लंबित हैं। दरअसल, शाखा के पास 43 वकील मौजूद हैं, फिर भी बीते 10 वर्ष में निगम के पक्ष में महज 20 प्रतिशत ही फैसले हुए हैं। जबकि निगम विधि शाखा पर हर वर्ष लगभग एक करोड़ रुपए खर्च करता है। हालांकि दो-तीन साल में जब भी शाखा के कामकाज की समीक्षा होती है। वकीलों के प्रदर्शन के हिसाब से उनको बदलने की सिफारिश भी की जाती है, लेकिन होता कुछ नहीं है। पांच साल पहले भी 19 वकीलों को उनके खराब प्रदर्शन रिपोर्ट की वजह से बदला जाना था, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव ने रिपोर्ट को फाइलों में ही कैद कर दिया।
वर्तमान में एक हजार 200 से ज्यादा मामलों में निगम के अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक उलझे हुए हैं। इन अधिकारियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए नगर निगम ने जिला न्यायालय में पैरवी करने के लिए 30 और उच्च न्यायालय में 11 वकीलों के साथ ही उच्चतम न्यायालय के दो वकील विधि शाखा का हिस्सा हैं। हर दूसरे दिन जांच में निगम के किसी न किसी अधिकारी या फिर वकील को खड़ा रहना पड़ता है।
कई वकीलों ने सालों से नहीं लड़ा केस-
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में निगम परिषद में पूर्व कांग्रेस पार्षद गिरीश शर्मा ने विधि शाखा में वकीलों की फौज होने के बावजूद कोर्ट में मामले लंबित होने का मुद्दा उठाया था। यही नहीं, उन्होंने होर्डिंग और बीआरटीएस जैसे करीब आधा दर्जन मामलों का हवाला भी दिया था। इसके बाद परिषद अध्यक्ष ने महापौर की अध्यक्षता में चार पार्षदों की समिति बनाई गई थी। समिति ने विधि शाखा की समीक्षा करते हुए 19 वकीलों को बदलने की अनुशंसा की थी। इसमें सेशन कोर्ट के 15 और हाई कोर्ट के चार वकील शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विधि शाखा में शामिल इन वकीलों के केस जीतने का प्रतिशत बहुत ही कम है। यही नहीं, कई वकीलों ने तो सालों से निगम का कोई केस लड़ा ही नहीं। इसके बाद खराब प्रदर्शन वाले वकीलों को हटाया जाने की तैयारी की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।