नीमच। नगर पालिका परिषद का विशेष सम्मेलन बुधवार को हंगामे, तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के बीच संपन्न हुआ। सदन में प्रस्तुत सभी 44 प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिए गए, लेकिन प्रस्ताव क्रमांक 44 के अनुक्रमांक 94 पर हुई बहस ने पूरे सम्मेलन का केंद्र बिंदु बना दिया। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद आमने-सामने आ गए तथा मत विभाजन तक की स्थिति बन गई।
बैठक की शुरुआत में विपक्षी पार्षदों ने शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति और अनियमित जल वितरण का मुद्दा उठाते हुए नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। इस पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) दुर्गा बामनिया ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी सदन में तीखी चर्चा हुई। पार्षद भारत अहीर, हरगोविंद दीवान सहित कई सदस्यों ने सफाई कर्मचारियों की कमी, कचरा वाहनों के अभाव और बिगड़ती सफाई व्यवस्था पर प्रशासन को घेरा। वहीं वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद ने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।
बैठक के दौरान शहर के चौराहों एवं मार्गों के नामकरण का मुद्दा भी गरमाया। पार्षद अरुण प्रजापति सहित अन्य सदस्यों ने जाति एवं समाज विशेष के आधार पर नामकरण का विरोध करते हुए सार्वजनिक स्थलों का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं राष्ट्रनिर्माताओं के नाम पर रखने की वकालत की। इस विषय पर सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद सामने आए।
सम्मेलन के अंतिम चरण में प्रस्ताव क्रमांक 44 के अनुक्रमांक 94 पर तीखी बहस और हंगामे के बाद मत विभाजन कराया गया, जिसमें प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। इस दौरान भाजपा के पांच पार्षदों ने भी इस विषय पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई।
सम्मेलन समाप्त होने के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। नगर पालिका परिसर में कांग्रेस के कुछ पार्षदों के बीच आपसी विवाद और नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली।