उज्जैन। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने ग्राम मंगरोला, सोडंग और झिरनिया की विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने (स्टे) के आदेश दिए हैं।
यह आदेश किसानों की याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिससे प्रभावित किसानों को अस्थायी राहत मिली है।
किसानों की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि किसानों द्वारा दिए गए वैकल्पिक मार्ग और डिजाइन परिवर्तन संबंधी सुझावों पर प्रशासन ने उचित तरीके से विचार नहीं किया।
यह भी आरोप लगाया गया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय किसी अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने यह भी पाया कि कई किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है, और मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न विचाराधीन हैं।
इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया है। इस फैसले से प्रभावित किसानों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।