चित्तौड़गढ़। शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड को राजस्थान सरकार के प्रतिष्ठित 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह-2026 में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कंपनी की छह इकाइयों को ‘शिक्षा विभूषण’ सम्मान से नवाजा गया। यह लगातार 11वां वर्ष है, जब शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हिन्दुस्तान जिंक को राज्य सरकार ने सम्मानित किया है।
जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) राजेश कुमार यादव ने राज्यभर से चयनित भामाशाहों एवं प्रेरकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मिड-डे मील आयुक्त विश्व मोहन शर्मा, समसा की राज्य परियोजना निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा, शिक्षा निदेशक सीताराम जाट एवं संयुक्त निदेशक महेंद्र खींची भी उपस्थित रहे।
छह इकाइयों को मिला सम्मान-
हिन्दुस्तान जिंक की रामपुरा आगूचा माइंस, चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर, जावर माइंस, राजपुरा-दरीबा कॉम्प्लेक्स, देबारी जिंक स्मेल्टर एवं कायड़ माइंस को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘शिक्षा विभूषण’ सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मान कंपनी की ओर से रामपुरा आगूचा माइंस के आईबीयू सीईओ राममुरारी, चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर की पर्यावरण प्रमुख मनीषा भाटी एवं हेड एचआर ममता शर्मा, देबारी जिंक स्मेल्टर के एसबीयू निदेशक विवेक यादव एवं हेड सीएसआर रुचिका चावला, दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के हेड सीएसआर अभय गौतम, जावर माइंस के वित्त प्रमुख अमित मालानी तथा कायड़ माइंस के हेड राजेश चौधरी ने प्राप्त किया।
शिक्षा पर 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश-
हिन्दुस्तान जिंक ने वर्ष 2017 से अब तक शिक्षा के क्षेत्र में 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसमें 83 करोड़ रुपये विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के विकास—कक्षा-कक्ष, शौचालय, खेल मैदान, पेयजल एवं विद्युतीकरण—पर खर्च किए गए हैं, जबकि 468 करोड़ रुपये दीर्घकालिक शिक्षा कार्यक्रमों पर व्यय किए गए।
हर वर्ष 2 लाख से अधिक बच्चों को लाभ-
कंपनी के शिक्षा कार्यक्रमों से प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक ग्रामीण एवं आदिवासी बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। नंद घर, शिक्षा संबल, जीवन तरंग, ऊंची उड़ान सहित कई योजनाओं के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशी शिक्षा तथा ग्रामीण बालिकाओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कंपनी के अनुसार, शिक्षा संबल कार्यक्रम से जुड़े 37 विद्यालयों ने 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल किए हैं। वहीं, राजस्थान में कक्षा 10वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 2007 के 47 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 92.53 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें बालिकाओं का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है।
शिक्षा विभाग से किया एमओयू-
ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूत बनाने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने राजस्थान शिक्षा विभाग के साथ एक एमओयू भी किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 36 करोड़ रुपये का निवेश कर प्रदेश में शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाया जाएगा।
4 हजार गांवों के 26 लाख लोगों तक पहुंच-
हिन्दुस्तान जिंक शिक्षा के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, स्वच्छता, आधारभूत संरचना एवं आजीविका संवर्धन जैसे क्षेत्रों में भी लगातार कार्य कर रही है। कंपनी की विभिन्न सीएसआर पहल से अब तक 4 हजार से अधिक गांवों के 26 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं।