नीमच की प्याज मंडी में नीचे में प्याज 3 रूपए किलो बिका वॉइस ऑफ़ एमपी की टीम ने कवरेज के दौरान पाया की किसान भाव कम होने के कारण प्याज बेचने नहीं आ रहे है, जिसके चलते प्याज की मात्र 1 हज़ार बोरी ही मंडी में बिकने के लिए आयी अब इसमें कहानी ये है की खुदरा बाजार में प्याज 15 से 20 रूपए किलो बिक रहा है ऐसे में सवाल यह उठता है की जब मंडी में प्याज इतने कम भाव में खरीदा जा रहा है तो फिर खुदरा बाजार में प्याज का भाव इतना ऊंचा क्यों ।
वॉइस ऑफ़ एमपी यह मुद्दा एक अरसे से उठाता आ रहा है की जब फसल किसान के पास होती है तो भाव रसातल और गड्ढे में चला जाता है और ज्योंही यह फसल व्यापारी के गोदाम या कोल्ड स्टोरेज में पहुँच जाती है इसका भाव आम आदमी को खून के आंसू रुलाने लगता है ।
अब इसमें सवाल यह उठता है की मुनाफ़ा जो उपभोक्ता की जेब से निकलता है वो उसके वास्तविक हकदार किसान तक नहीं पहुंचता इसीलिए यह देखने में आता है की एक किसान जो 50 साल से लहसून और प्याज उपजा रहा है उसकी आर्थिक स्थिति कभी बेहतर नहीं हुयी लेकिन एक व्यापारी जिसे इसका धंधा करते हुए मात्र 5 साल हुए वो करोड़पति हो जाता है यानी यह साफ़ है मेहनत किसान करता है और चांदी व्यापारी काटता है जबकि इसका वास्तविक हकदार वो किसान है जो रात और दिन खेत में पसीना बहाकर फसल उपजाता है ।
वॉइस ऑफ़ एमपी अपनी खबरों के माध्यम से सरकार से यह भी मांग करता आ रहा है की इस मुनाफाखोरी की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योकि भारत कहने को किसानो का देश कहा जाता है, और किसानो को बढ़िया - बढ़िया उपाधि दी जाती है लेकिन सरकार इन किसानो की बेहतरी के लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पायी जैसा की हाल ही में यह मांग उठती रही है की सरकार उपज के समर्थन मूल्य तय कर दे लेकिन इस अंतरिम बजट में भी केंद्र सरकार ने एमएसपी पर कोई निर्णय नहीं लिया यदि देश में सभी फसलों का समर्थन मूल्य तय हो जाए तो फिर मुनाफाखोरी और काला बाज़ारी पर रोक लग सकती है लेकिन ऐसा निकट भविष्य में होता नहीं दिखता और अन्नदाता यही खून के आंसू रोता दिखेगा।