शाजापुर। जिला अस्पताल अब नवजात बच्चों को गंभीर बताकर रैफर करने को लेकर सुर्खियों में है और नवजात गहन चिकित्सा इकाई के डॉक्टर मोटवानी अपनी मनमानी और गलती से बाज आने की बजाय बच्ची के परिजनों को धमकाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में परेशान पीड़ित परिवार ने सिविल सर्जन को लिखित शिकायत कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। गुरुवार को ग्राम झोंकर निवासी नजमा बी पति शेरू खान परिवार के साथ सिविल सर्जन एम के जोशी के समक्ष पहुंची और शिकायती आवेदन देकर बताया कि 23 जुलाई 2024 को में उन्होने अपनी बहू नीलो पति फरदीन को प्रसव हेतु जिला अस्पताल शाजापुर में भर्ती कराया था, जहां बहू को लडक़ी का जन्म हुआ। लडक़ी का स्वास्थ्य खराब होने पर आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया इसके बाद जिला अस्पताल के डॉक्टर भावेश मोटवानी ने 24 जुलाई को आकर कहा कि तुम्हारे बच्चे की तबीयत खराब है, इसे प्राइवेट अस्पताल लेकर जाओ या फिर इंदौर ले जाओ, जिसकी शिकायत 24 जुलाई 2024 को जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारयों से मौखिक रूप से की गई। नजमा बी ने बताया कि इसके बाद बच्ची को इलाज हेतु अस्पताल के आईसीयू वार्ड में ही रखा गया, लेकिन 25 जुलाई गुरुवार को डॉक्टर भावेश मोटवानी के द्वारा आकर धमकी दी जा रही है कि तुमने मेरी शिकायत की है अब मैं तुम्हारे खिलाफ कोर्ट में कैसे करूंगा और मेरा आधार कार्ड की फोटो कॉपी जमा करवा ली, साथ ही परिजनों ने आवेदन में बताया कि डॉक्टर भावेश मोटवानी मेरे द्वारा की गई मौखिक शिकायत से नाराज हैं जिससे अंदेशा है कि वह बच्ची के इलाज में लापरवाही बरत सकते हैं, यदि इलाज के दौरान मेरी बच्ची को कुछ हुआ तो उसके जिम्मेदार डॉक्टर मोटवानी होंगे। मामले में डॉक्टर मोटवानी के खिलाफ कार्रवाई की जाने और बच्ची का शाजापुर अस्पताल में ही इलाज किए जाने की मांग की गई है।
मामले ने तुल पकड़ लिया है इधर परिजनों के साथ भीम आर्मी कार्यकर्ता भी सिविल सर्जन से मिले जहां उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में आए दिन प्रसूताओं को जिला अस्पताल से प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है यदि मामले में परिवार को न्याय नहीं मिलता है तो जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।