जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में कहा गया है कि 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बजट के बावजूद हजारों स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिससे बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। साथ ही यह भी बताया गया कि हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम वर्ष 2018-19 के 67.74 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 38.53 प्रतिशत रह गया, जो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से शिक्षक नियुक्तियों, बजट के उपयोग और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत जवाब मांगा है।