सिंगोली। कस्बे में एक बार फिर बेस कीमती शासकीय भूमि निजी हाथों में सौंप जाने का मामला उजागर हुआ है। वर्ष 2010 में नीमच कलेक्टर और न्यायालय द्वारा शासकीय घोषित कर देने के बाद भी दस्तावेजों में कूट रचना कर भूमि को नीचे हाथों में सौंपे जाने की चर्चा हो रही है।
मामला सोमवार शाम उस समय उजागर हुआ जब नया बस स्टैंड स्थित उक्त भूमि पर राजस्थान निवासी एक व्यक्ति द्वारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। सार्वजनिक रूप से संज्ञेय मामले में अचानक हुए परिवर्तन के बाद बाजारों में बड़े भ्रष्टाचार की चर्चा हो रही है।
मंगलवार देर शाम प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार मामला नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्र के समक्ष पहुंच गया है। ऐसे में निकाय कर्मचारियों द्वारा बस्ते टटोले जाने से लगता है कलेक्टर ने समस्त दस्तावेज तलब किए हैं। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि निकाय कार्यालय में फिलहाल भूमि से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले हैं।
मामला नया बस स्टैंड स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 439 से जुड़ा हुआ है जिसमें वर्ष 2010 में ही कलेक्टर सहित न्यायालय ने भूमि को शासकीय घोषित कर दिया था। सूत्र यह भी बताते है कि नगर निकाय कार्यालय द्वारा नये सिरे से शुरू की गई नामांतरण प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा था। अब जब निर्माण कार्य शुरू हुआ तब बवाल मच गया है। परिषद से जुड़े अधिकतम पार्षदों ने मामले में जानकारी होने से अनभिज्ञता जताते हुए परिषद अध्यक्ष सहित अधिकारियों से जानकारी मांगी है।