भोपाल। इस बार 26 फरवरी को महाशिवरात्रि विशेष संयोग लेकर आ रही है। 152 साल बाद सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे। इससे पहले यह दुर्लभ योग 1873 में बना था। तब भी महाशिवरात्रि बुधवार को पड़ा था। ज्योतिषाचार्याे के अनुसार इस विशिष्ट योग में व्रत, अभिषेक और महामृत्युंजय जाप करने से आध्यात्मिक, धार्मिक उन्नति के साथ मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होंगी। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के पंडित विनोद गौतम के अनुसार, इस बार यह पर्व परिधि योग में मकर राशि के चंद्रमा तथा शिव जी के नक्षत्र श्रवण और धनिष्ठा की उपस्थिति में मनाया जाएगा।
चार पहर में करें भगवान की पूजा
पंडित गौतम के अनुसार, भक्तों को चार पहर में विशेष पूजा करनी चाहिए। प्रथम पहर में शाम 6 बजे , दूसरे प्रहर मे रात्रि 9 बजे, तीसरे पहर में अर्ध निशा काल 12रू00 बजे और चतुर्थ पहर रात्रि 3 बजे से पूर्व पूजा कर लेनी चाहिए। पूजा के दौरान भक्ति भाव से पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवायश् का जाप करना चाहिए। इस दौरान भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सभी प्रिय पत्ते, पुष्प, फल आदि अर्पण करना चाहिए। इस दिन किया महामृत्युंजय जाप विशेष फलदायी रहेगा।
आम के बोर चढ़ाने का नहीं है विधान
पंडित गौतम ने बताया कि अधिकतर लोग इस दिन आम की मंजरी (बोर) भगवान शिव को चढ़ाते हैं जबकि शास्त्रों में इसका कोई विधान नहीं है। इससे आम के फलों का नुकसान होता है, जो पुण्य के बजाय पाप का कारण बन सकता है। हालांकि, मुकुट बनाने के लिए बिना मंजरी वाले आम के पत्ते तोड़े जा सकते हैं।