मंदसौर। वन विभाग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के अवशेष, जिन्हें अवैध रूप से श्हत्था जोड़ीश् के नाम से बेचा जा रहा था, की तस्करी करते तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 19 हत्था जोड़ी बरामद की गई। तीनों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 15 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि नेहरू बस स्टैंड स्थित नेहरू पार्क गेट के पास वन्यजीवों के अवशेषों की अवैध बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर गठित विशेष टीम ने मौके पर दबिश देकर एक महिला और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरेश सिंह (54) पिता मलेसिंह पारदी, करोल सिंह (36) पिता मुछालसिंह पारदी और भारतबाई (52) पति सुरेश पारदी निवासी ग्राम रूपावली, पोस्ट साबाखेड़ा (मंदसौर) के रूप में हुई है।
वन विभाग के अनुसार, मॉनिटर लिजार्ड (गोह) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की प्रथम अनुसूची में शामिल संरक्षित प्रजाति है। इसका शिकार करना, व्यापार करना अथवा इसके अंगों की खरीद-फरोख्त करना दंडनीय अपराध है। आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 3832/16 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। इस अपराध में 3 से 7 वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
क्या है हत्था जोड़ी?
वन विभाग के अनुसार, हत्था जोड़ी कोई वनस्पति या चमत्कारी जड़ी-बूटी नहीं है, बल्कि यह मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के नर जननांग (हेमीपेनिस) का हिस्सा होता है। तंत्र-मंत्र, वशीकरण, धन प्राप्ति और भाग्य बदलने जैसे अंधविश्वासों के कारण इस संरक्षित वन्यजीव का अवैध शिकार कर उसके अंगों की तस्करी की जाती है। वन विभाग ने आमजन से ऐसे अंधविश्वासों से दूर रहने और वन्यजीव अपराधों की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की है।