नीमच। महिला स्वयं सहायता समूह संचालको द्वारा प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक शासकीय विद्यालयों में प्रतिदिन के मेनू अनुसार स्वयं सहायता समूह द्वारा दोपहर का मध्यान भोजन का संचालन लगभग 2 लाख 12 हजार कार्यरत रसोईया द्वारा किया जा रहा हैकिंतु महंगाई के इस दौर में प्रदेश के लगभग 96 हजार स्व सहायता समूह जो मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन करते हैंउन्हें माह अप्रैल 2025 सेअभी तक की भोजन पकाने की लागत राशि का विभाग द्वारा केंद्र सेराशि का आवंटननहीं होने का हवाला देकर भुगतान नहीं किया जा रहा है जिससे समूह संचालकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इन गरीब स्वयं सहायता समूह की बहनों को आवश्यक किराना सामग्री दाले शक्कर तेल किराना मसाला सामग्री हरी सब्जीया दूध ईधन गैस एव जरूरत की अन्य सामग्री आदि कर्ज लेकर क्रम की जा रही है शासन द्वारा प्राथमिक विद्यालय में प्रति बच्चे100 ग्राम खाद्यान्न एवं 6.78 पैसेएवं माध्यमिकविद्यालय में प्रति बच्चे150ग्राम खाद्यान्न एवं 10.17 पैसे शासन द्वारा निर्धारित है जो भी समय पर समूहों को नहीं मिल पा रही है महिला स्वयं सहायता समूह संघ द्वारा शासन से मांग है कि गई की महंगाई को देखते हुए खाद्यान्न एवं भोजन पकाने की लागत दर बढ़ाई जाए क्योंकि इतने कम खाद्यान्न में सामान्य आकार की प्राथमिक में दो एवं माध्यमिक में तीन रोटी भी बनना मुश्किल है क्योंकि प्रति छात्र जो निर्धारित100 एवं 150 सौ ग्राम खाद्यान्न मिलता हैइसकी साफ सफाई एवं पिसाई के बाद 80 ग्राम एवं130ग्रामके लगभग वजन बैठना भी मुश्किल है जिससेबच्चों को पूरा भोजन मिल पाना संभव नहीं है एवं मध्यान भोजनऔर आंगनवाड़ीका खाद्यान्नअलग से गुणवत्ता युक्त जारी किया जाए महिला स्वयं सहायता समूह संग प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती माया -मनोहर बैरागी द्वारा बताया गया कि शासन को इस महत्वपूर्ण योजना को गंभीरता से देखना चाहिए एवं लागत दर बड़ाना होगी तभी जाकर प्रदेश में कुपोषित बच्चे कुपोषण से मुक्त होंगे और उन्हें भरपूर पोषण मिलेगा वर्तमान में महंगाई के कारण सारी आवश्यकवस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं एवं मध्यान भोजन कीलागत दरें नहीं बढ़ने से योजना का संचालन करने मेंसमूह संचालक को बहुत परेशानी आ रही है प्रदेश मेंविद्यालयों मेंकाम छात्र संख्याएवं 60 वर्ष से अधिक का हवाला देकररसोईया को काम किया जा रहा हैजो कि गलत है क्योंकि उम्र के इस पड़ाव में अब रसोईयाकोई अन्य कार्य भी नहीं कर पाताइसलिए उन्हें बेरोजगार होने सेबचाया जाएऔर किसी भी कार्यरत रसोईया को नहीं हटाया जाए और रसोईया का मानदेय भी 12 महीने तक का मिले प्रदेश संगठनकी मांग है कि इन कामकाजी महिलाओं को लाडली बहनों की तर्ज पर प्रति माह निश्चित दिनांक कोभोजन पकाने की लागत राशि एवं कार्यरत रसोईया का मानदेय समय पर जारी हो विभाग द्वारा जून माह में रसोइया को 15 दिन का कार्य करने के बाद भी मानदेय नही दिया जाता जब की जून माह का खाद्यान एवं लागत राशी समूहो को आवंटित होती है ऐसा क्यो रसोईया को उनके द्वारा किए गए कार्य का महानताना मिलना चाहिए अगर 10 अगस्त से पूर्व भोजन पकाने की लागत राशिजमा नहीं होती हैतो फिर पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री महोदय के नाम 12 अगस्त कोसमस्त जिलों मेंजिला कलेक्टर महोदय को ज्ञापन दिया जाएगा एवं राशी के अभाव में विद्यालयो मे 15 अगस्त को विशेष भोजन प्रभावित होता है तो उसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी उक्त जानकारी महिला स्वयं सहायता समूह संगठन के प्रदेश प्रवक्ता सोना - भरत प्रजापत अठाना द्वारा दी गई।