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November 24, 2025, 10:54 am
KHABAR : मोरवन में प्रस्तावित टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पर्यावरणीय आशंकाएँ गहराईं, जिनेंद्र सुराणा ने कहा- निर्माण से पूर्व जल-जमीन-पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन अनिवार्य, पढ़े खबर 

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नीमच। मोरवन में निर्माणाधीन टेक्सटाइल इंडस्ट्री को लेकर क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय चिंताएँ उठ रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता जिनेंद्र सुराणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर कहा कि निवेश स्वागत योग्य है, लेकिन जल, जमीन, जलवायु और पर्यावरण से बड़ा कोई उद्योग नहीं हो सकता।

उन्होंने लिखा कि परंपरागत कपड़ा उत्पादन में भारी मात्रा में पानी खर्च होता है। रिपोर्टों के अनुसार 1 किलो डेनिम की धुलाई-रंगाई में लगभग 250 लीटर तथा 1 किलो सूती कपड़े में 200 लीटर पानी लगता है। हजारों टन उत्पादन की स्थिति में पानी की खपत करोड़ों-अरबों लीटर तक पहुँच जाती है। कपड़ा उद्योग से निकलने वाला रसायनयुक्त अपशिष्ट यदि पूर्णतः उपचारित न हो तो इससे भूजल, खेत, नदियाँ और मानव स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

सुराणा ने कहा कि मोरवन क्षेत्र हरा-भरा, जलसमृद्ध और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है। यही कारण है कि उद्योग द्वारा इतने जल-आधारित प्लांट को मोरवन जैसे जलसमृद्ध क्षेत्र में स्थापित करने पर सवाल खड़े होते हैं। यदि कंपनी की नजर मोरवन डैम और भूजल पर नहीं है तो यह उद्योग कम पानी वाले क्षेत्र में भी स्थापित हो सकता था।

उन्होंने 15 बिंदुओं में गंभीर प्रश्न उठाए-
उत्पादन प्रक्रिया में पानी की वास्तविक खपत कितनी होगी?
वार्षिक आवश्यकता के करोड़ों लीटर पानी का स्रोत क्या होगा?
वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कितनी होगी?
संभावित प्रदूषण से खेती, जलस्रोत और जनस्वास्थ्य को कैसे बचाया जाएगा?
स्थानीय लोगों को कितने स्थाई रोजगार मिलेंगे?
पर्यावरणीय अनुमति, सार्वजनिक सुनवाई और आपत्तियों की स्थिति क्या है?
क्या कंपनी स्कूल/अस्पताल जैसी सामाजिक सुविधाएँ विकसित करेगी?

उन्होंने कहा कि यदि ट्रीटमेंट सिस्टम आंशिक रूप से भी फेल हुआ तो भूजल और झीलें प्रदूषित होंगी, जमीन की गुणवत्ता घटेगी और बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता महेश पाटीदार ने कहा कि कोई भी उद्योग पर्यावरण से अधिक महत्वपूर्ण नहीं। जनता को जागरूक होकर आगे आना चाहिए और आवश्यक होने पर जनहित याचिका दायर कर पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की जाएगी।
 

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