नीमच। शहर के स्कीम नंबर-36 क्षेत्र में इन दिनों आयोजित भूमिया सरकार का दिव्य दरबार श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बागेश्वर धाम की तर्ज पर आयोजित इस दरबार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी समस्याओं, जिज्ञासाओं और मनोकामनाओं को लेकर पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ यह दरबार सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता का भी माध्यम बन रहा है।
राज पैलेस के समीप पुष्पेंद्र शर्मा के निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में ग्वालियर के प्रसिद्ध संत श्री श्री 1008 हरिओमदास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को सही दिशा देने के लिए उन्हें आध्यात्म, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती भौतिकता और तनावपूर्ण वातावरण के बीच आध्यात्मिकता ही व्यक्ति को आत्मबल, सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती है।
संत हरिओमदास जी महाराज ने कहा कि भूमिया सरकार का दिव्य दरबार केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास है। ऐसे आयोजन लोगों को मानसिक संबल प्रदान करने के साथ सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करना, जीवन में अनुशासन और सदाचार को बढ़ावा देना तथा समाज को सकारात्मक दिशा देना होना चाहिए। आस्था व्यक्ति को आत्मविश्वास प्रदान करती है और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
प्रेस वार्ता के दौरान संत हरिओमदास जी ने बागेश्वर धाम और वहां आयोजित होने वाले दिव्य दरबारों को लेकर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आस्था और श्रद्धा लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं, लेकिन इन्हें अंधविश्वास से अलग समझने की आवश्यकता है। किसी भी धार्मिक आयोजन का मूल उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच, संस्कार और जागरूकता का प्रसार होना चाहिए।
भूमिया सरकार के दिव्य दरबार को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दरबार में पहुंचकर आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। संत हरिओमदास जी महाराज के विचारों को लेकर युवाओं और आमजन के बीच भी सकारात्मक चर्चा देखने को मिल रही है।