रामपुरा। रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने घर-परिवार से निकलकर खिमला के ग्रीनको प्रोजेक्ट में काम करने आए मजदूरों के लिए रविवार का दिन दर्दनाक साबित हुआ। दोपहर के भोजन अवकाश के दौरान अचानक एक लिफ्ट हादसे का शिकार हो गई और उसमें सवार मजदूर चीख-पुकार के बीच नीचे जा गिरे। हादसे में सात श्रमिक घायल हो गए, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घायल मजदूरों को तत्काल किया नीमच रैफर-
प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसा रविवार दोपहर करीब 1 बजे लंच टाइम के दौरान हुआ। लिफ्ट में सवार मजदूर ऊपरी हिस्से से नीचे आ रहे थे, तभी अचानक लिफ्ट अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। हादसे में घायल सभी मजदूरों को तत्काल एम्बुलेंस की सहायता से उपचार के लिए नीमच लाया गया, जहां उनका इलाज ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में जारी है।
ये मजदूर हुए घायल-
हादसे में घायल श्रमिकों में मनोहर सिंह, चिन्मय घोष, राहुल यादव, जहीरूद्दीन अंसारी, विपिन कुमार, कमलेश सहित एक अन्य मजदूर शामिल है। सभी घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंसों के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
हादसे के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि जिस लिफ्ट की क्षमता छह व्यक्तियों की थी, उसमें कथित रूप से नौ मजदूर सवार थे। ऐसे में क्षमता से अधिक भार होने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं प्रोजेक्ट से जुड़े नीरज मीणा ने बताया कि लिफ्ट पर वेल्डिंग का कार्य किया जा रहा था, इसी दौरान तकनीकी कारणों से हादसा हुआ। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं अधिकांश मजदूर-
सूत्रों के अनुसार घायल अधिकांश श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार के निवासी हैं, जो ग्रीनको प्रोजेक्ट में विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे हुए थे। हादसे के बाद साथी मजदूरों और स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच-
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और प्रोजेक्ट प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दुर्घटना के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और लिफ्ट की तकनीकी स्थिति की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन यह भी पता लगा रहा है कि लिफ्ट का संचालन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।
सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल-
इस हादसे के बाद निर्माणाधीन परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल सभी घायल मजदूरों का उपचार जारी है और प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। दुर्घटना के कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।