नीमच। कृषि उपज मंडी में प्याज़ के दामों में पिछले दिनों आई तीखी गिरावट ने किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद प्रभावित किया था। हालाँकि अब भावों में हल्की बढ़त दर्ज की गई है, लेकिन किसान इसे राहत नहीं बल्कि सतही सुधार मान रहे हैं।
भावों में हलचल, राहत नहीं-
गुरुवार को नीमच मंडी में प्याज़ का ऊपरी भाव 17-18 रुपए प्रति किलो तक दर्ज हुआ, वह भी केवल चुनिंदा किसानों की बेहतर क्वालिटी के लिए।
मंडी के औसत भाव इस प्रकार रहे-
बेहतर क्वालिटीः 13-14 रुपए प्रति किलो
निम्न क्वालिटीः 5-6 रुपए प्रति किलो
किसानों का कहना है कि यह कोई मजबूती नहीं, सिर्फ बाजार में हलचल भर है।
लागत अधिक, बचत शून्य-
किसानों ने बताया कि प्याज़ की प्रति किलो लागत ही 12-14 रुपए तक बैठती है। ऐसे में अधिकांश किसान केवल लागत निकाल पा रहे हैं या घाटे में जा रहे हैं। किसान पहले ही महंगे बीज, डीएपी-यूरिया, कीटनाशक, मजदूरी, भाड़ा और छंटाई जैसे खर्चों के कारण दबाव में हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों कई किसानों ने मंडी भाव न मिलने की स्थिति में फसल को खेत में ही रोटावेटर चलाकर नष्ट कर दिया था, क्योंकि काटने, ढोने और बेचने का खर्च भाव से अधिक पड़ रहा था।
मेहनत हमारी, मुनाफा बिचौलियों का- किसान
किसानों का कहना है कि सरकार आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन प्याज़ में तो आधी भी नहीं बच रही। मेहनत हमारी है और मुनाफ़ा बिचौलियों का। किसानों की मांग है कि प्याज़ का न्यूनतम भाव 25 से 35 रुपए प्रति किलो तय किया जाए, तभी उनकी स्थिति सुधरेगी।
उम्मीदें कायम, संकट अभी भी गहरा-
प्याज़ की कीमतें ऊपर उठने की कोशिश में जरूर हैं, लेकिन किसान अभी भी घाटे के कुएं से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उनका कहना है कि उनकी मेहनत का सही मूल्य तभी मिलेगा जब नीति, बाज़ार और निर्यात तीनों किसानों के हित में काम करें।