मंदसौर। संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस बजट को गांव, गरीब, किसान और मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि यह ग्रामीण भारत की पूरी तरह अनदेखी का स्पष्ट उदाहरण है।
‘किसान का नाम तक नहीं लिया गया’
महेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि यह पहला ऐसा बजट है, जिसमें किसान का नाम तक नहीं लिया गया। न तो सिंचाई के लिए कोई नई योजना घोषित की गई, न खाद-बीज पर सब्सिडी बढ़ाई गई और न ही खेतिहर मजदूरों के लिए कोई राहत दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने और फसल बीमा योजना में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर सरकार ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है।
किसान की समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश का किसान आज बढ़ती खेती लागत, गिरते फसल दाम, बढ़ते कर्ज और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन मुद्दों पर न तो कोई ठोस चर्चा हुई और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया गया। इसके उलट सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े कॉरपोरेट्स को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा कि बजट में ग्रामीण रोजगार, सिंचाई सुविधाएं, मिट्टी स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण और खेतिहर मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी जैसी योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं है। “विकसित भारत” का सपना दिखाकर ग्रामीण भारत को अंधेरे में धकेला जा रहा है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
महेंद्र सिंह गुर्जर ने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए,
MSP को कानूनी गारंटी दी जाए
खाद-बीज पर सब्सिडी बढ़ाई जाए
किसानों और ग्रामीण भारत के लिए बजट में वास्तविक और ठोस राहत के प्रावधान किए जाएं
उन्होंने कहा कि जब तक किसान मजबूत नहीं होगा, तब तक देश का विकास अधूरा ही रहेगा।