छतरपुर। छतरपुर और पन्ना जिलों में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित किसानों, महिलाओं और आदिवासियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। 23 मार्च शहीद दिवस के अवसर पर जय किसान संगठन के बैनर तले “सांकेतिक फांसी एवं रक्त-पत्र सत्याग्रह” की शुरुआत की गई, जिसमें प्रभावितों ने सांकेतिक फांसी लगाकर और अपने खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई।
आंदोलन की शुरुआत सटई तहसील के सिलावट गांव से हुई, जहां करीब एक सैकड़ा किसान और महिलाएं एकत्रित हुए। इस दौरान महिलाओं ने भावुक शब्दों में पत्र लिखते हुए कहाकृ “प्रधानमंत्री जी से करें पुकार, उजड़ रहा है घर-संसार, प्रशासन कर रहा अत्याचार, हमें चाहिए न्याय-अधिकार।”
यह आंदोलन केनदृबेतवा लिंक, माझगाय मध्यम, नैगुवा एवं रुँझ लघु सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों द्वारा किया जा रहा है। प्रभावितों का आरोप है कि उच्च स्तरीय परियोजना होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारियों द्वारा मनमानी और तानाशाही की जा रही है। भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और लोगों को उनका वैधानिक हक नहीं मिल रहा।
प्रभावित महिला ममता कुशवाहा ने बताया कि उनका घर, जमीन और पेड़-पौधे सब कुछ अधिग्रहित किया जा रहा है, लेकिन मुआवजा बेहद कम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां जमीन का बाजार मूल्य लगभग 10 लाख रुपए प्रति एकड़ है, वहीं शासन केवल 3.5 लाख रुपए प्रति एकड़ दे रहा है, जिससे पुनर्वास संभव नहीं है। इस स्थिति में परिवार मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
अनीता प्रजापति और सोना अहिरवार सहित अन्य महिलाओं ने भी आरोप लगाया कि मुआवजे को लेकर स्पष्ट जानकारी तक नहीं दी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
जय किसान संगठन के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं बल्कि अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि परियोजनाओं में हो रही अनियमितताओं की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और प्रभावितों को उचित मुआवजा व सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन पूरे देश में व्यापक रूप लेगा।
इनकी रही सहभागितारू अमित भटनागर, रविंद्र सिंह, पार्षद दिव्या अहिरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।