नीमच। जिले में जून माह को मलेरिया निरोधक माह के रूप में मनाया जा रहा है। मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और प्रभावी रोकथाम के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की अध्यक्षता में अंतर विभागीय कार्यशाला आयोजित की गई।
टीएल बैठक के पश्चात आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
कलेक्टर चंद्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों की उत्पत्ति बढ़ जाती है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट कर ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर मच्छरजन्य परिस्थितियों को समाप्त करें और जनस्वास्थ्य संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
जिला मलेरिया अधिकारी अल्पेश कुमार बारिया ने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे अपने कार्यालय परिसरों, आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों पर जल जमाव न होने दें। कूलर, गमले, पुराने टायर, नारियल के खोल तथा अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली कराया जाए, ताकि मच्छरों के पनपने की संभावना समाप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और विभागीय समन्वय से ही जिले को मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया मुक्त बनाया जा सकता है। प्रशासन द्वारा मलेरिया निरोधक माह के दौरान जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ रोकथाम संबंधी उपायों पर विशेष जोर दिया जाएगा।