मंदसौर। जिले में बुधवार को आशा, ऊषा एवं आशा पर्यवेक्षक एकता यूनियन मध्यप्रदेश से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने लंबित मांगों और समय पर भुगतान नहीं मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया। जिलेभर से पहुंची कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप चौराहा से गांधी चौराहा तक रैली निकालकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नियमित वेतन भुगतान, प्रोत्साहन राशि में कटौती बंद करने, लंबित बकाया भुगतान, रिक्त पदों पर भर्ती तथा मानदेय बढ़ाने सहित विभिन्न मांगें शामिल थीं।
समय पर भुगतान नहीं मिलने का आरोप-
यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, इसके बावजूद उन्हें नियमित रूप से भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई बार तीन से चार माह तक मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि लंबित रहती है, वहीं बिना सूचना के कटौती भी कर दी जाती है।
गैर-विभागीय कार्यों का बढ़ता बोझ-
कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनसे आयुष्मान कार्ड सहित कई गैर-विभागीय कार्य भी कराए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें अपने स्तर पर खर्च करना पड़ता है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता। इससे आर्थिक कठिनाइयां बढ़ रही हैं।
हर माह समय पर भुगतान की मांग-
यूनियन ने मांग की है कि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक बिना किसी कटौती के भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा वेतन पर्ची की व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही पूर्व में काटी गई राशि का एरियर सहित भुगतान करने की मांग भी की गई।
26 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग-
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वेतन देने की भी मांग उठाई। यूनियन का कहना है कि वर्तमान मानदेय बढ़ती महंगाई और कार्यभार के अनुरूप नहीं है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।