कोटा। अफीम नीति 2026-27 के निर्धारण से पहले आयोजित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की सलाहकार समिति की बैठक उस समय सुर्खियों में आ गई, जब चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने भरी बैठक में एक नारकोटिक्स इंस्पेक्टर पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए। किसानों की समस्याओं और आगामी अफीम नीति पर चर्चा के बीच अचानक हुए इस घटनाक्रम से बैठक का माहौल गरमा गया। सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों और अधिकारी की सफाई के बाद जांच की मांग तेज हो गई, जबकि दूसरी ओर किसानों ने भी अफीम लाइसेंस, समर्थन मूल्य और उत्पादन संबंधी अपनी लंबित मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
आरोप सही पाए जाने पर होगी कठोर कार्रवाई-
झालावाड़ रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस बैठक में अफीम नीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। इसी दौरान सांसद जोशी ने बैठक में मौजूद एक इंस्पेक्टर का नाम लेते हुए उस पर कथित आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए। सांसद ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
इंस्पेक्टर ने स्वयं को बताया निर्दाेष, नार्काे टेस्ट के लिए तैयार-
आरोपों पर संबंधित इंस्पेक्टर ने स्वयं को निर्दाेष बताते हुए किसी भी प्रकार की अवैध राशि लेने से इनकार किया। उन्होंने यहां तक कहा कि वे जांच अथवा नार्काे टेस्ट जैसी किसी भी प्रक्रिया के लिए तैयार हैं। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नारकोटिक्स विभाग के उपायुक्त नरेश बुंदेल ने कहा कि लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों ने रखीं अफीम नीति से जुड़ी प्रमुख मांगें-
बैठक में शामिल किसान संगठनों और प्रतिनिधियों ने आगामी अफीम नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें भी रखीं। किसानों ने अफीम गोंद एवं सीपीएस का समर्थन मूल्य बढ़ाने, न्यूनतम अर्हता उपज में कमी करने, दो प्लॉटों में खेती की अनुमति देने तथा वर्षों से लंबित लाइसेंसों को बहाल करने की मांग की।
इन जिलों के अफीम उत्पादक किसान पहुंचे-
भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ एवं अन्य क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने कहा कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि अफीम का मूल्य वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है। किसानों ने प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई तथा नामांतरण एवं नॉमिनी संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग भी उठाई।
जनप्रतिनिधियों ने किसान हितों पर दिया जोर-
बैठक में सांसद सीपी जोशी के साथ विधायक कालूराम मेघवाल, गोविंद प्रसाद तथा विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सांसद जोशी ने अधिकारियों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि अफीम उत्पादन क्षेत्र की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
जांच और नीति दोनों पर टिकी निगाहें-
बैठक में लगाए गए आरोपों के बाद अब सबकी नजरें विभागीय जांच पर टिकी हैं। वहीं दूसरी ओर अफीम उत्पादक किसान आगामी अफीम नीति 2026-27 से भी बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। किसानों का मानना है कि नई नीति में उत्पादन, मूल्य निर्धारण, लाइसेंस नवीनीकरण और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि अफीम उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को राहत मिल सके।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए-
नारकोटिक्स इंस्पेक्टर पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं, तो मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। किसानों पर नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होती है, तो अफीम नीति के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार या अवैध वसूली में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। अफीम नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने से किसानों का विश्वास मजबूत होगा और व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।