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July 25, 2026, 5:40 pm
KHABAR : फर्जी मेडिकल दस्तावेज बनाकर अंतरिम जमानत बढ़वाने की साजिश नाकाम, तीन दोषियों को 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा, पढे़ बद्रीलाल गुर्जर की खबर

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मनासा। नीमच जिले के मनासा न्यायालय ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़वाने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार कराने के मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशुतोष यादव ने पिता-पुत्र सहित तीन आरोपियों को विभिन्न धाराओं में 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया।


न्यायालय ने ग्राम बर्डिया निवासी अमरलाल मालवीय और उसके पुत्र दीपक मालवीय को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास व ₹1,000-₹1,000 के अर्थदंड तथा धारा 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1,000-₹1,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, भीलवाड़ा (राजस्थान) निवासी रोहित यादव को धारा 420 के तहत 5 वर्ष तथा धारा 467 एवं 468 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।


अभियोजन के अनुसार एनडीपीएस एक्ट के एक प्रकरण में आरोपी अमरलाल न्यायिक अभिरक्षा में था। पत्नी के इलाज के आधार पर उसे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से एक माह की अंतरिम जमानत मिली थी। बाद में जमानत अवधि बढ़ाने के लिए उसने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें पैर में फ्रैक्चर और एसीएल टियर होने का दावा करते हुए मेडिकल दस्तावेज, चिकित्सीय प्रमाण-पत्र, प्लास्टर लगी तस्वीरें तथा पुत्र का शपथ-पत्र संलग्न किया गया।


हाईकोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें सभी मेडिकल दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर थाना मनासा में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना में सामने आया कि अमरलाल और उसके पुत्र दीपक ने जेल वापस जाने से बचने के उद्देश्य से भीलवाड़ा के मालू अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ कर्मचारी रोहित यादव से ₹10,000 देकर फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करवाए थे।


जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

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