मंदसौर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बुधवार को संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला मंदसौर के बैनर तले अप्रेजल (कार्य मूल्यांकन) प्रणाली के विरोध में प्रदर्शन करते हुए प्रतीकात्मक रूप से अप्रेजल की होली जलाई। कर्मचारियों ने इसे शोषणकारी व्यवस्था बताते हुए समाप्त करने की मांग की।
संघ पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2018 में लागू की गई अप्रेजल व्यवस्था का प्रदेशभर में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने विरोध किया था। कर्मचारियों का आरोप है कि यह प्रणाली पारदर्शी नहीं है तथा इसके माध्यम से मनमाने ढंग से कर्मचारियों पर कार्रवाई और सेवा समाप्ति का खतरा बना रहता है। इसी के विरोध में वर्ष 2018 में प्रदेश के बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हड़ताल और कार्य बहिष्कार भी किया था।
संघ का कहना है कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी वर्षों से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं। कोविड काल सहित विभिन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, लेकिन आज भी उन्हें सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और वेतन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर अप्रेजल प्रक्रिया के नाम पर महिला कर्मचारियों के साथ शोषण की शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली कर्मचारियों के लंबे अनुभव और सेवाओं का उचित सम्मान नहीं करती।
संघ की प्रमुख मांगों में अप्रेजल प्रणाली को पूर्णतः समाप्त करना, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण करना तथा वेतन विसंगतियों को दूर करना शामिल है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष कुणाल वाघेला ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो 8 जून 2026 को जिले के समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।
संघ ने शासन से मांग की है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समय-सीमा में निराकरण किया जाए, ताकि कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश आंदोलन का रूप न ले तथा आमजन को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं की ओर शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रयास है। उनका विश्वास है कि संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव है।