नीमच। आशा, ऊषा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। आंदोलन आशा-ऊषा-आशा पर्यवेक्षक एकता यूनियन मध्यप्रदेश (सीटू) के नेतृत्व में किया गया।
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने प्रोत्साहन राशि के अनियमित भुगतान, मनमानी कटौती और बढ़ते कार्यभार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की महत्वपूर्ण कड़ी होने के बावजूद आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों को समय पर पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है। कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि लंबित रहती है तथा कटौती की स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जाती। वेतन पर्ची की व्यवस्था नहीं होने से भुगतान में पारदर्शिता का अभाव बना हुआ है।
यूनियन ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों के अलावा अन्य शासकीय जिम्मेदारियां भी आशा कार्यकर्ताओं पर डाली जा रही हैं। आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसे कार्यों में कई कार्यकर्ताओं को स्वयं के खर्च पर काम करना पड़ा है।
कार्यकर्ताओं ने मांग की कि आशा एवं पर्यवेक्षकों का भुगतान प्रत्येक माह की 5 तारीख तक बिना कटौती के किया जाए, पूर्व में काटी गई राशि एरियर सहित वापस दी जाए तथा भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। इसके अलावा 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, रिक्त पदों पर भर्ती, अतिरिक्त कार्यों का अलग भुगतान और सेवा समाप्ति की मनमानी कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की गई।