नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार देर रात वरिष्ठ नौकरशाहों के स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उच्च शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता व जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
दीप्ति गौर मुखर्जी इससे पहले कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की सचिव के रूप में कार्यरत थीं। उनकी नियुक्ति से करीब तीन सप्ताह पहले 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया था। बाद में यह नियुक्ति स्थगित कर दी गई और अब दीप्ति गौर मुखर्जी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्यों बदली गई गंगवार की नियुक्ति?
नरेश पाल गंगवार को जुलाई में उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के बाद उनके परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत मिली सब्सिडी को लेकर मीडिया रिपोर्टों में सवाल उठाए गए थे। गंगवार ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया था और कहा था कि परिवार के सदस्यों ने संबंधित नियमों के तहत लाभ प्राप्त किया।
हालांकि, सरकार की ओर से गंगवार की नियुक्ति को स्थगित करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इसे किसी विवाद के कारण लिया गया फैसला बताना आधिकारिक पुष्टि के बिना उचित नहीं होगा।
कौन हैं दीप्ति गौर मुखर्जी?
दीप्ति गौर मुखर्जी 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। वे केंद्र सरकार में कॉरपोरेट मामलों की सचिव के रूप में कार्य कर चुकी हैं। अब वे उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी।
उच्च शिक्षा सचिव के रूप में उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े नीतिगत मुद्दों तथा परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।
तीन सप्ताह में बदला उच्च शिक्षा विभाग का नेतृत्व-
जुलाई में नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त करते हुए तत्कालीन सचिव विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाया गया था। अब गंगवार की नियुक्ति स्थगित होने के बाद दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
अन्य विभागों में भी फेरबदल-
इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ केंद्र सरकार के कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भी वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इससे केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सचिव स्तर पर व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ है।
उच्च शिक्षा विभाग में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति, परीक्षा सुधार और उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। नई जिम्मेदारी के साथ दीप्ति गौर मुखर्जी की भूमिका इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।