नीमच। सिंगोली थाना क्षेत्र के चर्चित काना उर्फ कन्हैयालाल भील हत्याकांड में करीब पांच साल बाद न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, नीमच आलोक कुमार सक्सेना की अदालत ने आरोपी छीतर पिता जयराम गुर्जर, उम्र 36 वर्ष, निवासी पाटन, तहसील सिंगोली को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं 1 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं प्रकरण में शामिल अन्य सात आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
न्यायालय ने यह फैसला विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 39/2021 में 7 अगस्त 2026 को सुनाया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा एवं अशोक कुमार सोनी ने पैरवी की।
पत्नी की तलाश में निकला था कन्हैयालाल-
अभियोजन के अनुसार 26 अगस्त 2021 की सुबह काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ मोटरसाइकिल से पत्नी की तलाश में ग्राम बाणदा से ग्राम जेतलिया होते हुए सिंगोली-नीमच रोड पर पहुंचा था। दोनों राहगीरों और वाहन चालकों से उसकी पत्नी के संबंध में पूछताछ कर रहे थे।
इसी दौरान अथवाकलां फंटे के समीप कन्हैयालाल सड़क पर खड़ा होकर पत्नी की तलाश कर रहा था। अभियोजन के अनुसार सुबह करीब 6 बजे आरोपी छीतर गुर्जर मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा और कन्हैयालाल को सामने से टक्कर मार दी। इससे वह सड़क पर गिर गया और उसके सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद उसके साथ मारपीट किए जाने की बात भी अभियोजन में सामने आई।
घटना के बाद कन्हैयालाल को उपचार के लिए नीमच अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
रस्सी से बांधकर पिकअप से घसीटने का वीडियो हुआ था वायरल-
घटना के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा में आ गया था। पुलिस जांच के दौरान कन्हैयालाल को रस्सी से बांधकर पिकअप वाहन से घसीटे जाने की बात सामने आई थी। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिसके बाद मामला व्यापक रूप से चर्चा में आया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त वाहनों, मोबाइल फोन सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए। घटनास्थल से संबंधित भौतिक साक्ष्य, चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्य तथा आवश्यक दस्तावेज जुटाकर न्यायालय में अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया।
साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला-
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से महत्वपूर्ण गवाहों के बयान कराए गए तथा विवेचना के दौरान जुटाए गए मौखिक, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी छीतर गुर्जर को हत्या का दोषी माना।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत छीतर गुर्जर को आजीवन कारावास एवं 1 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अन्य सात आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
प्रकरण की निगरानी के लिए पुलिस अधीक्षक, नीमच द्वारा नोडल अधिकारी नियुक्त कर समय-समय पर इसकी मॉनीटरिंग की गई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा एवं अशोक कुमार सोनी ने प्रभावी पैरवी की।