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September 1, 2026, 5:41 pm
KHABAR : जहां 27 बच्चों की मौत, वहां 134 बच्चे फिर बीमार, बालाघाट जिला अस्पताल में एक बेड पर 3-4 मासूम, उल्टी-दस्त, मलेरिया और बुखार से पीड़ित, पढे़ खबर 

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बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट में बच्चों की बीमारी से फिर हालात बिगड़ गए हैं। जहां 27 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है, वहां फिर करीब 134 बच्चे बीमार हैं। इनमें कई बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार, मलेरिया, डायरिया, खसरा और सर्दी-खांसी से पीड़ित हैं।


50 बेड के जिला अस्पताल में एक बेड पर 3-4 बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। रोजाना करीब 20 से 30 बच्चे भर्ती होते हैं। अभी यह संख्या कई गुना बढ़ गई है। 13 बच्चे भर्ती हैं। परिजन ने कहा- अस्पताल में जगह नहीं है। एक ही बेड पर कई बच्चों का इलाज चल रहा है।


सोनगुड्डा से बेटी मानसी का इलाज कराने पहुंचे साधुसिंह टेकाम ने गांव में स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था की समस्या बताई। उन्होंने कहा कि गांव में कई लोग मलेरिया से बीमार हैं। उनकी बेटी को पहले मलेरिया हुआ था। इसके बाद पीलिया हुआ और फिर दोबारा मलेरिया हो गया।


साधुसिंह के मुताबिक, 14-15 वार्ड वाली सोनगुड्डा पंचायत में कई परिवार हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं। नल-जल योजना होने के बावजूद करीब आधे वार्डों में पानी नहीं पहुंच रहा है। पानी की समस्या कई साल से बनी हुई है।


ग्राम कोरका से टीकासिंह मरकाम अपनी बेटियों संतोषी और स्तुति को लेकर अस्पताल पहुंचे। दोनों के शरीर पर दाने होने की बात कही गई है। दोनों बच्चों को भर्ती कराया गया है। हमारे इलाके के कई लोगों के बच्चे भर्ती हैं।


कुंडेकसा से सुक्कुसिंह धुर्वे अपने बेटे युवराज को लेकर पहुंचे। उसे उल्टी और दस्त की शिकायत है। सिजोरा निवासी संतोष टेकाम की बेटी मानसी भी मलेरिया से पीड़ित है। परिजन तीन दिन पहले उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।


100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से अस्पताल आ रहे परिजन
परिजन ने बताया- जिले के दूर-दराज इलाकों से परिवार बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। कुछ परिवारों को इलाज के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे बच्चों के साथ परिजनों की परेशानी भी बढ़ रही है।


स्टाफ नर्स की तत्काल व्यवस्था की मांग
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के मुताबिक, बच्चों के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की मांग करते हुए जबलपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर को पत्र लिखा है। इसमें अतिरिक्त बेड और स्टाफ नर्स की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की गई है।


डेढ़ महीने से प्रभावित गांवों से पहुंच रहे बच्चे
उन्होंने बताया- करीब डेढ़ महीने से प्रभावित गांवों से लगातार बीमार बच्चों को जिला अस्पताल लाया जा रहा है। इलाज के बाद गांव लौटने वाले कुछ बच्चे दोबारा बीमार पड़ रहे हैं। प्रभावित गांवों में बीमारी की स्थिति और बच्चों के बार-बार बीमार होने की वजह से आंकड़े बढ़ रहे हैं।


जून के अंतिम सप्ताह से 27 बच्चों की मौत
जून के अंतिम सप्ताह से अब तक इन बीमारियों से करीब 27 बच्चों की मौत हुई है। इनमें बैगा और गोंड जनजाति के बच्चे भी शामिल हैं। 29 जुलाई को 10 साल की काजल सैयाम की मौत के बाद यह आंकड़ा 27 तक पहुंच गया था।

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