इंदौर। इंदौर के ऐतिहासिक डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक भले ही संपन्न हो चुकी हो, लेकिन वहां राजनीतिक सरगर्मियों का दौर लगातार जारी है। संघ के राष्ट्रीय मंथन के तुरंत बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर संघ के शीर्ष पदाधिकारियों से मुलाकात करने पहुँचे। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के दौरे के ठीक बाद हुई इस उच्चस्तरीय मुलाकात ने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
बी.एल. संतोष के दौरे के बाद सीएम की एंट्री
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संघ की बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर का डेली कॉलेज पहुंचना महज औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा है। इससे एक दिन पहले ही बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने भी डेली कॉलेज पहुँचकर संघ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया था। लगातार हो रही इन मुलाकातों को सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, भावी राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रदेश के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर भावी रणनीति तैयार करने के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरसंघचालक मोहन भागवत की उपस्थिति में हुआ था मंथन
गौरतलब है कि डेली कॉलेज में आयोजित संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर के तमाम शीर्ष पदाधिकारी शामिल हुए थे। तीन दिनों तक चले इस मंथन में सामाजिक समरसता, नशामुक्ति अभियान, आरक्षण, जैन समाज से जुड़े विषयों और विभिन्न सामाजिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई। माना जा रहा है कि संघ की बैठक में तय किए गए अभियानों और सामाजिक सरोकारों को जमीन पर उतारने में राज्य सरकार की भूमिका और सहयोग को लेकर मुख्यमंत्री की इस बैठक में अहम बातचीत हो सकती है।
क्या प्रदेश को मिलने जा रही है नई दिशा?
संघ की राष्ट्रीय बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश संगठन मंत्री और केंद्रीय संगठन मंत्री की बैक-टू-बैक बैठकों के बाद राजनीतिक विश्लेषक कई तरह के कयास लगा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या संघ के इस मंथन के बाद प्रदेश सरकार और बीजेपी संगठन के लिए कोई नया रोडमैप तय होने जा रहा है? हालांकि, इस मुलाकात के आधिकारिक एजेंडे का ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन डेली कॉलेज में हुए इस सियासी मंथन के बाद सत्ता, संगठन और संघ के बीच आगामी रणनीतियों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।