खरगोन। जिले की कसरावद विधानसभा के ग्राम बलगांव में शिव डोले के दौरान हुए विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए जा रहे हैं। एक पक्ष ने शिव डोले के दौरान पथराव का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से मस्जिद, वाहनों और घरों में तोड़फोड़ तथा आगजनी की शिकायत पुलिस के समक्ष दर्ज कराई गई है।
घटना के बाद अब मामले की जांच पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने प्रशासन के समक्ष हनुमान चालीसा कर प्रदर्शन किया और शिव डोले के दौरान पथराव किए जाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी घटना के दौरान धार्मिक स्थल, वाहनों और घरों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दी है।
करीब 60 मिनट की CCTV फुटेज ने खड़े किए सवाल
घटना के बाद सामने आई करीब 60 मिनट की CCTV फुटेज को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। फुटेज में कुछ लोग मोटरसाइकिलों से गांव में पहुंचते और अलग-अलग गलियों में भीड़ के बीच दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में एक व्यक्ति अलग-अलग स्थानों पर फोन पर बात करते, सीटी बजाते और इशारे करते हुए भी नजर आने की बात सामने आई है।
हालांकि CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले लोगों की भूमिका और उनकी गतिविधियों की वास्तविकता जांच का विषय है। फुटेज की फॉरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना से पहले और बाद में वास्तव में क्या गतिविधियां हुई थीं।
पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बाहर से आई भीड़ कैसे पहुंची?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब गांव में पहले से पुलिस बल मौजूद था और क्षेत्र को संवेदनशील माना जा रहा था, तो बाहर से आई कथित भीड़ गांव के अंदर तक कैसे पहुंची? समय रहते पुलिस द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि घटना से कुछ दिन पहले इसी गांव में विवाद हुआ था और पुलिस जांच चल रही थी। ऐसे में संवेदनशील स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
निष्पक्ष जांच से सामने आ सकता है पूरा सच
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि शिव डोले के आयोजन जिले के कई गांवों में हुए, लेकिन विवाद बलगांव में ही क्यों हुआ। हालांकि इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CCTV फुटेज की फॉरेंसिक जांच के साथ-साथ संबंधित समय की कॉल डिटेल, पुलिस वायरलेस लॉग, ड्यूटी डायरी और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद कार्रवाई की डोर प्रशासन के हाथों में है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि बलगांव में विवाद की शुरुआत कैसे हुई, हिंसा किस स्तर तक पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग थे।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक घटनाक्रम सामने लाने और क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की है।