नीमच। कुछ धरोहरें केवल पत्थरों से नहीं बनतीं, बल्कि वे सदियों की आस्था, संस्कृति और जनविश्वास को अपने भीतर समेटे रहती हैं। नीमच अंचल में स्थित माँ मोड़ी माताजी, जिन्हें श्रद्धालु खेड़ा माताजी के नाम से भी जानते हैं, का पावन धाम ऐसी ही आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन बावड़ी हमारी सांस्कृतिक विरासत और पूर्वजों की दूरदृष्टि की अनमोल निशानी है।
समय के थपेड़ों और उपेक्षा के चलते अपनी पहचान खोती जा रही इस प्राचीन बावड़ी का जनसहयोग से किया गया जीर्णाेद्धार विरासत संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण है। बताया जाता है कि यहां मिले कुछ स्थापत्य अवशेष परमार काल से संबंधित माने जाते हैं। ये अवशेष इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व की ओर संकेत करते हैं और इसके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
यह पहल केवल एक बावड़ी के कायाकल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था के पुनर्जागरण और समाज की सामूहिक शक्ति का प्रतीक भी है। जब लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए एकजुट होते हैं, तो उपेक्षित विरासत को भी नया स्वरूप और नई पहचान मिल सकती है।
माँ मोड़ी माताजी को आरोग्य तीर्थ के रूप में मानने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता रानी की कृपा से जीवन में आशा, शांति और संबल मिलता है। बावड़ी के जल से जुड़ी अनेक लोकमान्यताएं भी जनआस्था का हिस्सा हैं। इन मान्यताओं के साथ इस धरोहर का संरक्षण जल, जीवन और संस्कृति के गहरे संबंध की याद दिलाता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यह माता रानी की कृपा है या समाज के संकल्प की शक्ति? श्रद्धालु इसे माँ का आशीर्वाद मानते हैं, वहीं सामाजिक दृष्टि से यह जनसहयोग और सामूहिक प्रयास की सफलता का उदाहरण है। जब श्रद्धा सेवा का रूप लेती है और विश्वास सामूहिक संकल्प में बदलता है, तो वर्षों से उपेक्षित विरासत भी फिर से अपना गौरव हासिल कर सकती है।
नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ के दरबार में शीश नवाने के साथ ही हमें अपने मंदिरों, बावड़ियों, जलस्रोतों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का संकल्प भी लेना चाहिए। विरासत केवल हमारे पूर्वजों की धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।
माँ मोड़ी माताजी की यह प्राचीन बावड़ी संदेश देती है कि आस्था जीवित हो, समाज एकजुट हो और संकल्प दृढ़ हो, तो स्वर्णिम विरासत को फिर से संवारा जा सकता है। माँ के प्रति श्रद्धा, विरासत के प्रति सम्मान और समाज का सामूहिक प्रयासकृयही सच्ची भक्ति का सुंदर स्वरूप है।