मध्य प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर अब सरकार के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। गुरुवार को कैबिनेट के बाद ऊर्जा विभाग की बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शहरों और गांवों की बिजली सप्लाई में भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब शहरों में बिजली को लेकर परेशानी नहीं है, तो गांवों में लोगों को पर्याप्त बिजली क्यों नहीं मिल रही है?
मंत्री करण सिंह वर्मा समेत अन्य मंत्रियों ने भी बिजली कटौती से लोगों में नाराजगी और शिकायतें मिलने की बात कही। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिजली संकट दूर करने के प्रयासों की जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि एक-दो दिन में अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
CM बोले- कम बारिश से सप्लाई पर असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल बारिश जल्दी थमने और कुल बारिश कम होने के कारण बिजली सप्लाई पर असर पड़ा है। धान की बोनी देर से होने के कारण जिलों में बिजली की मांग बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि गुजरात और सरदार सरोवर से 800 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी बिजली लेने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य सचिव बोले- इसी हफ्ते सप्लाई नियंत्रण में आएगी
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि गुजरात से बातचीत हुई है और इसी हफ्ते बिजली सप्लाई काफी हद तक नियंत्रण में आने की उम्मीद है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अचानक गर्मी बढ़ने और रबी सीजन की बोनी शुरू होने से बिजली की मांग बढ़ी है। अधिकारियों ने आपूर्ति जारी रहने की बात कही, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ दिक्कतें स्वीकार कीं।
पिछली कैबिनेट में भी उठा था मुद्दा
नवरात्र के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती बढ़ने का मुद्दा पिछली कैबिनेट बैठक में भी उठा था। विधायकों और मंत्रियों ने लगातार बिजली सप्लाई नहीं होने की शिकायतें रखी थीं। क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से मिल रही शिकायतों के चलते इस बार भी मंत्रियों ने सवाल उठाए।
ऊर्जा मंत्री बोले- कम बारिश से उत्पादन घटा
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि कम बारिश से जल विद्युत उत्पादन घटा है, जबकि तकनीकी खराबी से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकार बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों से बिजली लेने और बंद इकाइयों को दोबारा चालू करने की कोशिश कर रही है।