भोपाल। मध्य प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और नकल माफिया व पेपर लीक करने वालों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। अब एमपी में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली या नकल कराने वालों की खैर नहीं होगी। ऐसे मामलों की त्वरित और सख्त सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने 4 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का बड़ा फैसला किया है। खास बात यह है कि ऐसा सख्त कदम उठाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
कहां-कहां बनाई जाएंगी विशेष कोर्ट और कहां के जाएंगे केस?
सरकार द्वारा राज्य के चार प्रमुख संभागों में इन विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है, जिसके तहत न्यायक्षेत्र का निर्धारण इस प्रकार किया गया है
भोपाल कोर्ट: इसके दायरे में भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिले आएंगे।
इंदौर कोर्ट: इसके अंतर्गत इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास सहित पूरा मालवा-निमाड़ बेल्ट शामिल होगा।
ग्वालियर कोर्ट: इसमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ के मामले चलेंगे।
जबलपुर कोर्ट: इसके अधीन जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल और महाकौशल-बुंदेलखंड के अन्य शेष जिले रहेंगे।
3 महीने में ट्रायल पूरा करने का कड़ा टारगेट
इन विशेष अदालतों के गठन का मुख्य उद्देश्य मामलों का तेजी से निपटारा करना है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि चार्जशीट दाखिल होने के महज 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर लिया जाए। इसके लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति भी की जाएगी, जो कोर्ट में साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति और गवाहों के समय पर प्रबंधन पर विशेष फोकस रखेंगे। इसके साथ ही, परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए हर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) का गठन भी किया जाएगा। सरकार के इस सख्त फैसले से नकल माफियाओं और सॉल्वर गैंग्स में हड़कंप मच गया है।