नीमच। जिले में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए जनभागीदारी से बोरी बंधान कार्य शुरू किया गया है। इसके तहत जिले की सभी 243 ग्राम पंचायतों में स्थानीय स्तर पर जल संरचनाओं को चिह्नित कर पानी के बहाव को नियंत्रित करने और वर्षा जल को अधिक समय तक रोककर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमन वैष्णव के मार्गदर्शन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा यह पहल की जा रही है। इसके अंतर्गत पुराने बोरों में मिट्टी और रेत भरकर तालाबों, चेकडैम, स्टॉपडैम, नहरों तथा अन्य जल संरचनाओं के आसपास आवश्यकतानुसार बोरी बंधान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पानी के बहाव की गति कम करना और जल संचयन को बढ़ावा देना है।
जल संरचनाओं के संरक्षण पर जोर-
ग्राम पंचायतों में बोरी बंधान के साथ ही आवश्यकता के अनुसार स्टॉपडैम पर कड़ी शटर लगाने और मिट्टी के बांध बनाने जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के माध्यम से उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और वर्षा जल को अधिक समय तक संरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किए जा रहे ये कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने में सहायक होंगे।
किसानों और पशुपालकों को मिलेगा लाभ-
बोरी बंधान से पानी के बहाव को नियंत्रित करने और जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे आसपास की कृषि भूमि में नमी बनाए रखने, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के लिए पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने में भी ये प्रयास उपयोगी साबित हो सकते हैं।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान-
जिले की सभी 243 ग्राम पंचायतों में जनसहयोग से किए जा रहे बोरी बंधान कार्य जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। स्थानीय संसाधनों और जनभागीदारी के माध्यम से किए जा रहे इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के संरक्षण और उनके बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।