झाबुआ। जिले में फसल अवशेष एवं नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश का उद्देश्य वायु प्रदूषण और आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाने के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति तथा आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। नरवाई जलाने पर भूमि के रकबे के अनुसार 2,500 से 15,000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाएगा।
मध्यप्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग द्वारा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 18(5) के अंतर्गत जारी निर्देशों के अनुपालन में कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत संपूर्ण झाबुआ जिले की राजस्व सीमा में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश 14 अक्टूबर से 6 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगा।
कंबाइन हार्वेस्टर के साथ मशीन का उपयोग अनिवार्य-
जारी आदेश के अनुसार, जिले में फसल कटाई के लिए उपयोग किए जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) अथवा स्ट्रॉ रीपर में से किसी एक मशीन का उपयोग अनिवार्य रहेगा। नरवाई से भूसा तैयार करने के इच्छुक किसान स्ट्रॉ रीपर का उपयोग कर सकेंगे।
जिला परिवहन अधिकारी और सहायक कृषि अभियांत्रिकी को कंबाइन हार्वेस्टर के संचालन की निगरानी करने तथा निर्धारित मशीनों के बिना संचालन पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
नरवाई जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान-
फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट होते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण और आगजनी का खतरा भी बढ़ता है। किसानों को नरवाई जलाने के बजाय उसका उपयोग मल्चिंग, पशुओं के लिए भूसा तैयार करने और भूसे के विपणन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त करने में करने की सलाह दी गई है।
किसान खरीफ फसल की कटाई के बाद खड़ी नरवाई में बिना जुताई किए हैप्पी सीडर या सुपर सीडर से सीधे बुवाई भी कर सकते हैं। इसके अलावा बेलर, रेकर और चॉपर मशीनों से नरवाई के बंडल बनाकर उनका उपयोग औद्योगिक ईंधन, आच्छादन और भूसा निर्माण में किया जा सकता है।
रकबे के अनुसार लगेगा अर्थदंड-
शासन की अधिसूचना और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुरूप नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई है।
2 एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 2,500 रुपये।
2 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 5,000 रुपये।
5 एकड़ से अधिक भूमि: प्रति घटना 15,000 रुपये।
निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त-
आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, झाबुआ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कृषि विकास अधिकारी और क्षेत्रीय पटवारी संयुक्त जांच कर प्रतिवेदन तहसीलदार को देंगे। तहसीलदार संबंधित किसान को सुनवाई का अवसर देने के बाद सात दिनों के भीतर अर्थदंड के संबंध में निर्णय लेंगे।
आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अन्य माध्यमों से किया जाएगा। साथ ही जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार और थाना कार्यालयों सहित ग्रामीण एवं नगरीय निकायों के सूचना पटल पर आदेश प्रदर्शित किए जाएंगे।
उल्लंघन पर होगी दंडात्मक कार्रवाई-
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश 14 अक्टूबर से 6 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगा।