भोपाल। लाड़ली बहना योजना में दोबारा रजिस्ट्रेशन शुरू करने के दावे-प्रतिदावे के बीच मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर बाजार से 4500 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए सरकार ने तीन अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। इनमें 1000 करोड़, 2000 करोड़ और 1500 करोड़ रुपए के ऋण शामिल हैं। तीनों ऋणों की नीलामी 19 अक्टूबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुंबई कार्यालय में ई-कुबेर के माध्यम से होगी।
सरकार चार साल, 12 साल और 22 साल की अवधि के लिए अलग-अलग ऋण लेगी। इनमें एक नया चार वर्षीय ऋण, 12 साल की अवधि वाली पहले जारी सरकारी प्रतिभूतियों का पुनः निर्गम और 22 साल की अवधि का ऋण शामिल है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार की वार्षिक उधारी सीमा करीब 87 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। पहले नौ महीने के लिए 58 हजार 274 करोड़ रुपए की बाजार ऋण सीमा स्वीकृत हुई है।
चार साल के लिए 1000 करोड़ रुपए
सरकार चार साल की अवधि के लिए 1000 करोड़ रुपए का ऋण लेगी। इसकी नीलामी 19 अक्टूबर को होगी। इस पर ब्याज दर नीलामी के दौरान तय की जाएगी। सफल बोलीदाताओं को 21 अक्टूबर 2026 को भुगतान करना होगा। ऋण की मूल राशि 21 अक्टूबर 2030 को चुकाई जाएगी।
12 साल के लिए 2000 करोड़ रुपए
सरकार 22 जुलाई 2026 को जारी 7.58ः ब्याज दर वाली मध्यप्रदेश सरकारी प्रतिभूतियों को दोबारा जारी कर 2000 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण पर 7.58 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। ब्याज का भुगतान हर साल 22 जनवरी और 22 जुलाई को होगा। मूल राशि 22 जुलाई 2038 को चुकाई जाएगी।
22 साल के लिए 1500 करोड़ रुपए
सरकार 22 साल की अवधि के लिए 1500 करोड़ रुपए का ऋण भी लेगी। इस पर 7.66 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। ब्याज का भुगतान हर साल 19 फरवरी और 19 अगस्त को किया जाएगा। मूल राशि 19 अगस्त 2048 को चुकाई जाएगी।
विकास परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि
सरकार ने अधिसूचना में कहा है कि कर्ज से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल प्रदेश में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। इन ऋणों के लिए केंद्र सरकार की आवश्यक सहमति मिलने की जानकारी भी अधिसूचना में दी गई है।
6 अक्टूबर को लिया था 3000 करोड़ का कर्ज
इससे पहले 6 अक्टूबर को भी राज्य सरकार ने 3000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। यह राशि 1000-1000 करोड़ रुपए की तीन किस्तों में जुटाई गई थी। सरकार ने उस समय कहा था कि इस राशि का उपयोग पूंजीगत परिसंपत्तियां बनाने और विकास कार्यों में किया जाएगा। वेतन, पेंशन, प्रशासनिक खर्च या लाड़ली बहना योजना के भुगतान में इसका इस्तेमाल नहीं होगा।