नीमच। अफीम नीति 2026-27 जारी होने में हो रही देरी को लेकर किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं, किसान नेता सोहनलाल आंजना ने भी नीति जारी नहीं होने पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से जल्द नीति घोषित करने की मांग की है। जोकचंद ने चेतावनी दी है कि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 21 अक्टूबर को केंद्र सरकार के खिलाफ जनआंदोलन किया जाएगा। दूसरी ओर, आंजना ने नई अफीम नीति में लुवाई-चिराई के पट्टे 10 आरी के ही रहने की जानकारी देते हुए किसानों से खेत तैयार रखने की बात कही है। अफीम नीति में देरी और पट्टों को लेकर किसानों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
नीति जारी होने में देरी का किसानों को भुगतना पड़ेगा खामियाजा-
किसान नेता जोकचंद ने कहा कि पिछले वर्ष 11 सितंबर को अफीम नीति जारी हो गई थी, जबकि इस बार अब तक नीति का इंतजार किया जा रहा है। उनके अनुसार, नीति जारी होने में देरी से किसानों की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। अफीम की खेती संवेदनशील होती है और मौसम का प्रतिकूल असर फसल पर पड़ सकता है। ऐसे में समय पर निर्णय नहीं होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दो सांसद होने के बावजूद किसान परेशान क्यों?
जोकचंद ने मंदसौर संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से लोकसभा में सांसद सुधीर गुप्ता और राज्यसभा में सांसद बंशीलाल गुर्जर हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद किसान अफीम नीति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं उठा रहे हैं। जोकचंद ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विदेश दौरों का जिक्र करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि किसानों की समस्याओं पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
अफीम का भाव एक लाख रुपये किलो करने की मांग-
किसान नेता ने अफीम के मौजूदा मूल्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को वर्तमान में करीब 1,800 से 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कीमत मिल रही है। मालवा और मेवाड़ के किसान औषधीय उपयोग वाली इस फसल का उत्पादन कर सरकार को देते हैं, लेकिन उन्हें इसका उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि किसानों को अफीम का भाव बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम दिया जाए, ताकि खेती की लागत और किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
डोडाचूरा और एनडीपीएस एक्ट को लेकर भी उठाए सवाल-
जोकचंद ने डोडाचूरा की खरीद बंद होने और एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 के तहत दर्ज मामलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अफीम से संबंधित प्रक्रिया के बाद बचने वाले डोडाचूरा को लेकर किसानों के सामने समस्याएं हैं। उनके अनुसार पहले सरकार डोडाचूरा खरीदती थी, लेकिन अब खरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं। उन्होंने मांग की कि डोडाचूरा से जुड़े नियमों और कानूनी प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने तत्कालीन मंदसौर एसपी मनोज कुमार सिंह की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। जोकचंद ने कहा कि इस विषय पर किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
हजारों युवाओं के मामलों पर पुनर्विचार की मांग-
किसान नेता जोकचंद ने कहा कि नीमच-मंदसौर क्षेत्र के कई युवा एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 8/29 के तहत दर्ज मामलों में जेल में बंद हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के कारण अनेक किसान परिवार प्रभावित हो रहे हैं। जोकचंद ने आरोप लगाया कि पूर्व में इस कानून पर विचार करने के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार से संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामलों की समीक्षा करने की मांग की।
21 अक्टूबर को आंदोलन की चेतावनी, किसानों की प्रमुख मांगें-
श्यामलाल जोकचंद ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अफीम नीति 2026-27 समय पर जारी नहीं हुई और मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 21 अक्टूबर को केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों के साथ जनआंदोलन किया जाएगा।
किसान नेता की प्रमुख मांगें-
- वर्ष 1997-98 में काटे गए अफीम पट्टों को बहाल किया जाए।
- नए किसानों को भी अफीम की खेती करने का अधिकार दिया जाए।
- डोडाचूरा से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर पुनर्विचार कर उसे एनडीपीएस एक्ट से बाहर करने की मांग पर निर्णय लिया जाए।
- अफीम का मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए।
- अफीम नीति 2026-27 जल्द जारी कर किसानों की शंकाएं दूर की जाएं।
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आंजना ने फेसबुक पोस्ट में दी जानकारी, 10 आरी के ही रहेंगे लुवाई-चिराई के पट्टे!
किसान नेता सोहनलाल आंजना ने अफीम नीति 2026-27 में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए जल्द नीति जारी करने की मांग की है। आंजना ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि नई अफीम नीति में लुवाई-चिराई के पट्टे 10 आरी के ही रहेंगे। उन्होंने किसानों से खेत तैयार रखने की बात भी कही है। अब किसानों की नजरें अफीम नीति की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।