भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मास्टरप्लान और परिसीमन के मुद्दे पर खुद भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही घमासान मच गया है। पार्टी की भोपाल महानगर की कोर कमेटी की हालिया बैठक में सांसद, मंत्रियों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशानिक निर्णयों और नीतियों पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन महामंत्री के सामने बैठक में खुलकर असंतोष सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मास्टरप्लान को लेकर नेताओं के तीखे तेवर
बैठक के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जिस तरह से सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, उससे अंदरखाने चल रही नाराजगी खुलकर बाहर आ गई। पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह ने बैठक में दो टूक मांग करते हुए कहा कि भोपाल का मौजूदा मास्टरप्लान पूरी तरह से रद्द होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मास्टरप्लान के जरिए चुनिंदा अधिकारियों की कॉलोनियों का एफएआर बढ़ा दिया गया है, लेकिन आम जनता की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी की गई है। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष विकास विरानी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मास्टरप्लान की खामियों के कारण शहर के करीब एक लाख व्यापारी परेशान हैं और इस समस्या का ठोस समाधान मास्टरप्लान में किया जाना चाहिए।
परिसीमन और विधानसभा क्षेत्रों के बदलाव पर भी असंतोष
बैठक में केवल मास्टरप्लान ही नहीं बल्कि परिसीमन के मुद्दे पर भी जमकर मंथन हुआ और नेताओं ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। सांसद आलोक शर्मा ने परिसीमन को लेकर सुझाव देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें मुस्लिम आबादी हर विधानसभा क्षेत्र में संतुलित रूप से शामिल रहे। उन्होंने तर्क दिया कि पच्चीस साल पुराने परिसीमन के दौरान मुस्लिम आबादी केवल भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित होकर रह गई थी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कृष्णा गौर ने भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के कुछ इलाकों के दूसरे हिस्सों में काटे जाने या शिफ्ट होने को लेकर अपनी शिकायतें सामने रखीं। कोर कमेटी की इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के दिग्गजों द्वारा इस तरह खुलकर असंतोष जताए जाने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।