नीमच। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर मां महामाया भादवामाता के दरबार में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कोई नंगे पांव पैदल यात्रा कर माता के दर्शन के लिए पहुंच रहा है, तो कोई मां के जयकारे लगाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। नीमच सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और मनोकामनाएं लेकर दरबार पहुंच रहे हैं।
जगह-जगह सेवा शिविर, 35 से 40 तरह के व्यंजनों की व्यवस्था-
पैदल यात्रियों की सेवा के लिए नीमच से लेकर माता के दरबार तक जगह-जगह श्रद्धालुओं और समाजसेवियों ने सेवा शिविर लगाए हैं। इन शिविरों में करीब 35 से 40 तरह के व्यंजनों के स्टॉल लगाकर भक्तों को भोजन और जलपान कराया जा रहा है। कहीं खिचड़ी परोसी जा रही है, तो कहीं खीर, पोहे, भजिये, शरबत और अन्य व्यंजनों की व्यवस्था की गई है।
सेवा शिविरों में सेवाभावी लोग प्रेम और श्रद्धा के साथ श्रद्धालुओं को भोजन करा रहे हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा के दौरान उन्हें राहत मिल सके और उनकी यात्रा सुगम हो सके।
सेवा और समर्पण की दिख रही अनूठी मिसाल-
मां के जयकारों के बीच भक्तों की सेवा का यह नजारा धार्मिक आस्था के साथ सेवा और समर्पण की भावना को भी दर्शा रहा है। कोई भोजन कराकर तो कोई पानी और शरबत पिलाकर पैदल यात्रियों की थकान दूर करने में जुटा है। सेवा शिविरों के माध्यम से श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए लोग पूरे उत्साह से अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।
कुल मिलाकर, शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर नीमच से मां महामाया भादवामाता के दरबार तक भक्ति, आस्था और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। चारों ओर मां के जयकारे गूंज रहे हैं और श्रद्धालु दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।