चित्तौड़गढ़। बोजुंदा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे श्री कालाजी बावजी, कालभैरव एवं कालिका माताजी के प्राचीन देवस्थल पर शारदीय नवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान सोमवार को हवन एवं कन्या पूजन के साथ संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पूजा-अर्चना की।
प्राचीन और आस्था का प्रमुख केंद्र है देवस्थल-
बोजुंदा स्थित श्री कालभैरव मंदिर, जिसे श्री काला बावजी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन एवं आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रत्येक शनिवार को बावजी की गादी लगती है। इस देवस्थल पर श्री कालभैरव, शेष अवतार जी, मां कालिका, मां जगदंबा और शिव परिवार के मंदिर भी स्थापित हैं। वर्षभर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
राजस्थान सहित कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु-
मान्यता है कि श्री काला बावजी के दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालुओं के अनुसार, यहां चित्तौड़गढ़ जिले और आसपास के क्षेत्रों के अलावा राजस्थान के विभिन्न हिस्सों तथा मुंबई, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
नवरात्रि में हुए नियमित धार्मिक अनुष्ठान-
भोपाजी बाबूलाल जटिया ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के दौरान देवस्थल पर नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। नवरात्रि के समापन पर हवन एवं कन्या पूजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ नवरात्रि पर्व का समापन हुआ।