नीमच। जिले में विद्युत दुर्घटनाओं के बाद मुआवजे को लेकर दबाव बनाने, अधिकारियों-कर्मचारियों को धमकाने और शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोपों के बीच बिजली विभाग के कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। बिजली अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बुधवार शाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर जीवन सिंह शेरपुर और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के साथ अभद्रता और धमकियों का सिलसिला नहीं रुका, तो जिलेभर के अधिकारी-कर्मचारी काम बंद कर मोबाइल स्विच ऑफ हड़ताल करेंगे। इससे जिले की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
मुआवजे के लिए दबाव बनाने और धमकियां देने के आरोप-
ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया कि जीवन सिंह शेरपुर और उनके सहयोगी विद्युत दुर्घटनाओं के बाद घटनास्थल पर भीड़ जुटाकर धरना-प्रदर्शन करते हैं। साथ ही अधिकारियों पर नियमों से परे जाकर 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का मुआवजा तत्काल स्वीकृत करने और हत्या का मामला दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता है।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों-कर्मचारियों को मारने, घर से उठा ले जाने, करंट लगाकर जान से मारने तथा सब स्टेशन और ग्रिड में आग लगाने जैसी धमकियां दी जा रही हैं। समिति के अनुसार, इन धमकियों से संबंधित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। कर्मचारियों ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।
एफआईआर के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप-
समिति ने ज्ञापन में बताया कि अधीक्षण यंत्री, मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, नीमच वृत्त की ओर से 7 अक्टूबर 2026 को नीमच कैंट थाने में एफआईआर क्रमांक 0525 दर्ज कराई गई थी। समिति का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के हौसले बढ़ रहे हैं।
समिति ने कहा कि आउटसोर्स एजेंसियों से जुड़ी विद्युत दुर्घटनाओं में क्षतिपूर्ति का निर्धारण निर्धारित नियमों और अनुबंध की शर्तों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
गुंडा एक्ट, रासुका और पुलिस सुरक्षा की मांग-
संघर्ष समिति ने जीवन सिंह शेरपुर और उनके सहयोगियों के खिलाफ गुंडा एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और जिला बदर जैसी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही आपातकालीन और नियमित विद्युत संचालन के दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
समिति ने यह भी कहा कि किसी विद्युत दुर्घटना में निष्पक्ष जांच के बिना अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। आउटसोर्स एजेंसियों के दायित्वों और नियमों की स्थिति जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से आमजन के सामने स्पष्ट करने की मांग भी की गई।
अंतिम चेतावनी देकर कार्रवाई की मांग-
समिति ने ज्ञापन को अंतिम अल्टीमेटम बताते हुए प्रशासन से कर्मचारियों की सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग की। समिति ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने और धमकियां जारी रहने की स्थिति में अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक रूप से काम बंद कर मोबाइल स्विच ऑफ हड़ताल करेंगे। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।