नीमच। अपनी लंबित मांगों को लेकर कोटवारों ने अब आंदोलन तेज कर दिया है। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में प्रदेशभर के कोटवार 22 से 28 अक्टूबर तक सात दिवसीय कामबंद हड़ताल पर चले गए हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को नीमच जिला कलेक्टर कार्यालय पर जिलेभर के कोटवारों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
8 से 9 हजार रुपये मासिक वेतन में परिवार चलाना मुश्किल-
कोटवारों का कहना है कि महंगाई के मौजूदा दौर में महज 8 से 9 हजार रुपये मासिक वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद मुश्किल हो गया है। लंबे समय से लंबित मांगों का निराकरण नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी के चलते संगठन ने प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल का निर्णय लिया है।
स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग-
कोटवारों की प्रमुख मांग है कि उन्हें स्थायी शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही संगठन ने वर्दी वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। प्रदर्शनकारी कोटवारों का कहना है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक और सेवा संबंधी परेशानियों से राहत मिल सके।
28 अक्टूबर तक निर्णय नहीं हुआ तो भोपाल में होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन-
संगठन ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 28 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 31 अक्टूबर से भोपाल में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल नीमच में कोटवारों का धरना-प्रदर्शन जारी है। अब देखना होगा कि प्रदेशव्यापी हड़ताल और आंदोलन की चेतावनी के बाद सरकार कोटवारों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है।