भोपाल। विकास योजना-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर गुरुवार को किसानों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध जताते हुए आपत्तियां उठाईं। मुगालिया छाप के किसान कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने के विरोध में पैदल मार्च कर भोपाल पहुंचे।
वहीं, मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को योजना से हटाने की मांग करते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) विभाग के समक्ष लिखित आपत्तियां सौंपीं। दोनों पक्षों ने विकास योजना में स्थानीय आबादी, आजीविका, सार्वजनिक संस्थानों और पर्यावरण के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।
66 गांवों की कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका
मुगालिया छाप के किसान गुरुवार को मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पैदल भोपाल पहुंचे। वे टीएनसीपी कार्यालय जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें नीलबड़ पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इससे नाराज किसान सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किया जा रहा है। इससे हजारों किसानों की खेती और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने मांग की कि उनकी कृषि भूमि को प्रभावित करने वाले प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया जाए।
एक महीने बढ़ाई जाए दावे-आपत्तियों की अवधि
किसानों ने मास्टर प्लान पर दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की मांग की, ताकि सभी प्रभावित किसान योजना का अध्ययन कर अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकें।
प्रदर्शन के दौरान टीएनसीपी की सहायक संचालक आयुक्त इंदू त्रिपाठी किसानों को समझाने के लिए नीलबड़ पहुंचीं। उन्होंने बताया कि नियमानुसार मास्टर प्लान पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा और संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
मिसरोद की आबादी के बीच से सड़क हटाने की मांग
गुरुवार को ही ग्राम मिसरोद के रहवासियों ने भोपाल विकास योजना-2047 में पुरानी और घनी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने खसरा नंबर 205 से प्रस्तावित मार्ग को योजना से हटाने के लिए टीएनसीपी विभाग को लिखित आपत्तियां सौंपीं।
रहवासियों का कहना है कि सड़क के प्रस्ताव से वर्षों पुराने मकानों, सैकड़ों परिवारों, प्राचीन मंदिरों और क्षेत्र के सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है। उन्होंने शासकीय अस्पताल मिसरोद, सेवा सहकारी समिति, लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस, राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित कार्यालय और पाटीदार समाज के सामाजिक एवं मांगलिक प्रांगण के संरक्षण की मांग भी की है।
इसके अलावा, क्षेत्र में मौजूद लगभग 10 से 15 पुराने पीपल और बरगद के पेड़ों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। रहवासियों ने प्रस्तावित मार्ग का संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने और पुरानी आबादी तथा सार्वजनिक संस्थानों को कम से कम प्रभावित करने वाले वैकल्पिक मार्ग का तकनीकी सर्वे कराने का आग्रह किया है।
विकास योजना में स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग
किसानों और मिसरोद के रहवासियों की आपत्तियों में कृषि भूमि, पुरानी आबादी, आजीविका और पर्यावरण के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। किसानों ने अपनी जमीन को प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है, जबकि मिसरोद के रहवासियों ने आबादी के बीच प्रस्तावित सड़क को हटाकर वैकल्पिक मार्ग तलाशने की मांग की है।
दोनों पक्षों ने संबंधित अधिकारियों से उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई कर उचित निर्णय लेने का आग्रह किया है। मिसरोद के रहवासियों ने मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में विधिक कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखने की बात भी कही है। उनका संदेश है “ग्राम मिसरोद की ग्राम आबादी बचाओ, हमारा गांवदृहमारा अधिकार।”