नीमच। मालवा-मेवाड़ के अफीम उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने अफीम फसल वर्ष 2026-27 की नई नीति जारी कर दी है। लंबे समय से नई अफीम नीति का इंतजार कर रहे मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों की नजर अब लाइसेंस की पात्रता, मार्फिन औसत और खेती के लिए निर्धारित मानकों पर टिकी है। नई नीति में लुनाई-चिराई और सीपीएस श्रेणी के किसानों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में इस बार किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसे 10 आरी का पट्टा मिलेगा, किसे 5 आरी का लाइसेंस मिलेगा और किन शर्तों के आधार पर पात्रता तय होगी।
4.4 किलोग्राम मार्फिन औसत वाले किसानों को 10 आरी का पट्टा-
दी गई जानकारी के अनुसार, लुनाई-चिराई पद्धति से अफीम उत्पादन करने वाले जिन किसानों ने प्रति हेक्टेयर 4.4 किलोग्राम मार्फिन औसत हासिल की है, उन्हें नई नीति के तहत 10 आरी के पट्टे दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, अंतिम पात्रता निर्धारित नियमों और संबंधित किसान की श्रेणी के आधार पर तय होगी।
सीपीएस किसानों के लिए भी अहम प्रावधान-
नई नीति में सीपीएस यानी बिना लांसिंग के पोस्त कैप्सूल और भूसे के उत्पादन से जुड़े किसानों की पात्रता को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन किसानों ने पिछले फसल सत्र में सीपीएस श्रेणी के तहत 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की निर्धारित उपज जमा कराई है, वे संबंधित पात्रता शर्तें पूरी करने पर लाइसेंस के लिए पात्र हो सकते हैं।
3.0 से 4.4 किलोग्राम मार्फिन औसत वाले किसानों पर नजर
लुनाई-चिराई श्रेणी में 3.0 से 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मार्फिन औसत देने वाले किसानों के लिए भी नई नीति महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे कुछ किसानों के लाइसेंस लुनाई-चिराई श्रेणी से सीपीएस श्रेणी में स्थानांतरित किए जाने और उन्हें 5 आरी का पट्टा दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इस संबंध में किसान अपनी श्रेणी और पात्रता की पुष्टि आधिकारिक नीति से अवश्य करें।
सीपीएस के लिए 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का लक्ष्य-
नई नीति में आगामी फसल वर्ष 2027-28 की पात्रता के लिए सीपीएस श्रेणी में भूसे के साथ बिना लांस किए गए पोस्त कैप्सूल की औसत उपज 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। ऐसे में किसानों के लिए निर्धारित उपज के मानक को पूरा करना आगामी वर्षों में लाइसेंस की पात्रता के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
मालवा-मेवाड़ के किसानों की नई नीति पर नजर
नीमच, मंदसौर और राजस्थान के अफीम उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को नई नीति का बेसब्री से इंतजार था। अब नीति जारी होने के बाद किसानों के बीच लाइसेंस, मार्फिन औसत, सीपीएस और लुनाई-चिराई श्रेणी से जुड़े नियमों को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपनी श्रेणी, पिछले फसल वर्ष की उपज और लाइसेंस की स्थिति के अनुसार आधिकारिक अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों की जांच करें।