नीमच। मध्यप्रदेश के अफीम उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने अफीम फसल वर्ष 2026-27 की नई लाइसेंसिंग नीति जारी कर दी है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की ओर से 23 अक्टूबर को जारी इस नीति में किसानों के लाइसेंस, उपज के मानक, खेती के क्षेत्र और आगामी फसल वर्ष की पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
नई नीति के तहत इस बार 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज का मानक अहम रहने वाला है। वहीं, पहली बार बिना लांसिंग के पोस्त भूसे के उत्पादन के लिए पात्र होने वाले किसानों को पांच फसल वर्षों तक का लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे में नई नीति का सीधा असर अफीम की खेती करने वाले किसानों की पात्रता पर पड़ेगा।
800 किलो प्रति हेक्टेयर उपज की शर्त अहम-
नई अफीम नीति के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में जिन किसानों ने बिना लांसिंग के पोस्त भूसे की औसत उपज 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या उससे अधिक जमा कराई है, वे अन्य शर्तें पूरी करने पर वर्ष 2026-27 के लिए लाइसेंस के पात्र हो सकते हैं। वहीं, 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम उपज देने वाले किसानों को इस फसल वर्ष में खेती से प्रतिबंधित किया गया है।
इसके अलावा, वर्ष 2024-25 में कम उपज के कारण जिन किसानों के लाइसेंस वर्ष 2025-26 के लिए निलंबित किए गए थे, उन्हें भी अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने पर नए फसल वर्ष में लाइसेंस प्राप्त करने का अवसर दिया गया है।
पात्र किसानों को पांच साल तक का लाइसेंस-
नई नीति में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। बिना लांसिंग के पोस्त भूसे के उत्पादन के लिए पहली बार पात्र होने वाले किसानों को पांच फसल वर्षों के लिए लाइसेंस जारी किया जा सकता है। इसके तहत वर्ष 2026-27 के लिए जारी लाइसेंस वर्ष 2030-31 तक प्रभावी रह सकता है। हालांकि, इसके लिए किसानों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। अवैध गतिविधियों और विभागीय निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस प्रभावित हो सकता है।
अगले फसल वर्ष के लिए 900 किलो उपज का लक्ष्य-
सरकार ने आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी उपज का मानक निर्धारित किया है। अधिसूचना के मुताबिक, अगले वर्ष लाइसेंस की पात्रता हासिल करने के लिए फसल वर्ष 2026-27 में भूसे के साथ बिना लांस किए गए पोस्त कैप्सूल की औसत उपज 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए।
नीति में यह भी प्रावधान है कि जिन किसानों ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अपनी पूरी खड़ी फसल की जुताई कराई थी और वर्ष 2026-27 में भी पूरी फसल की जुताई कराते हैं, उन्हें वर्ष 2027-28 के लिए लाइसेंस का पात्र नहीं माना जाएगा।
4.4 किलोग्राम मार्फिन औसत पर 10 आरी का पट्टा-
लुनाई-चिराई पद्धति से अफीम उत्पादन करने वाले जिन किसानों का प्रति हेक्टेयर मार्फिन औसत 4.4 किलोग्राम रहा है, उन्हें नई नीति के तहत 10 आरी के पट्टे दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
3.0 से 4.4 किलोग्राम औसत वालों के लिए 5 आरी का पट्टा-
वहीं, 3.0 से 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मार्फिन औसत वाले कुछ किसानों के लाइसेंस लुनाई-चिराई श्रेणी से सीपीएस श्रेणी में स्थानांतरित कर 5 आरी का पट्टा दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, किसानों की अंतिम पात्रता उनकी श्रेणी और आधिकारिक नीति में निर्धारित शर्तों के अनुसार तय होगी।
खेती के क्षेत्र और अतिरिक्त रकबे पर भी नियम-
नई नीति के तहत प्रत्येक पात्र किसान को एक भूखंड पर अधिकतम 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर दूसरे व्यक्ति की भूमि पट्टे पर लेकर भी खेती की जा सकती है। वहीं, लाइसेंस में स्वीकृत क्षेत्र से पांच प्रतिशत तक अधिक खेती को निर्धारित नियमों के तहत क्षम्य माना जा सकता है।
ऑनलाइन जारी होगी पात्र किसानों की सूची-
नई नीति के तहत पात्र किसानों के नाम केंद्रीय नार्काेटिक्स ब्यूरो यानी सीबीएन की आधिकारिक वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। किसानों को मोबाइल संदेश, ई-मेल या अन्य माध्यमों से भी सूचना दी जा सकती है। पात्रता सूची में शामिल किसानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। मौजूदा लाइसेंसधारियों को सीबीएन के पास पहले से उपलब्ध दस्तावेज दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन जानकारी में बदलाव होने पर संबंधित विवरण देना होगा।
किसानों के लिए नई नीति क्यों है अहम?
केंद्र सरकार की नई अफीम नीति में उपज, लाइसेंस की अवधि, खेती के अधिकतम क्षेत्र और आगामी वर्ष की पात्रता से जुड़े महत्वपूर्ण नियम निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में नीमच, मंदसौर सहित मध्यप्रदेश के अफीम उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपनी उपज और लाइसेंस की स्थिति के अनुसार नियमों को समझें। हालांकि, अंतिम पात्रता केंद्रीय नार्काेटिक्स ब्यूरो की निर्धारित प्रक्रिया और अधिसूचना में दी गई शर्तों के आधार पर ही तय होगी।