नीमच। केंद्र सरकार द्वारा घोषित वर्ष 2026-27 की नई अफीम नीति को लेकर पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने नई नीति को अफीम उत्पादक किसानों के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और तथाकथित किसान नेताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जाजू ने आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों से किसानों को झूठे आश्वासन और वादों के जरिए भ्रमित किया जा रहा था, लेकिन नई नीति घोषित होने के बाद वास्तविकता सामने आ गई है।
नीति घोषित करने में 40 दिन की देरी, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
डॉ. जाजू ने कहा कि वर्ष 2025-26 की तुलना में इस बार अफीम नीति करीब 40 दिन देरी से घोषित की गई है। इसके चलते किसानों को अफीम की खेती और उत्पादन के लिए अनुकूल मौसम मिलने में परेशानी हो सकती है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन में कमी आने की आशंका है, जिसका सीधा आर्थिक नुकसान अफीम उत्पादक किसानों को उठाना पड़ सकता है।
मार्फीन की मात्रा बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय
पूर्व विधायक ने कहा कि वर्ष 2025-26 की नीति में मार्फीन की निर्धारित मात्रा 4.2 थी, जिसे नई नीति में बढ़ाकर 4.4 कर दिया गया है। उन्होंने इस संशोधन को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि अफीम का उत्पादन पूरी तरह मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में मापदंडों को और कठोर करना किसानों की चिंता बढ़ाने वाला निर्णय है।
सीपीएस किसानों को भी लगा झटका
डॉ. जाजू ने सीपीएस पद्धति से खेती करने वाले किसानों के लिए किए गए बदलाव पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछली नीति में निर्धारित मात्रा से अधिक वजन देने वाले सीपीएस किसानों को पारंपरिक चीरा पद्धति में स्थानांतरित करने का प्रावधान था, लेकिन नई नीति में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
इससे उन किसानों को निराशा हाथ लगी है, जो बेहतर उत्पादन के आधार पर पारंपरिक चीरा पद्धति का लाइसेंस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
आने वाले वर्षों में पट्टे बचाना भी हो सकता है मुश्किल
जाजू ने आशंका जताई कि नीति की घोषणा में देरी, मौसम की अनिश्चितता और कठोर मापदंडों के चलते किसानों के सामने आगामी वर्षों में अपने अफीम पट्टे बरकरार रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में किसान भविष्य में लाइसेंस की पात्रता से भी बाहर हो सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों से पूछा—आखिर कितनी मांगें हुईं पूरी?
पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से सवाल करते हुए कहा कि पिछले कई महीनों से अफीम सलाहकार समिति की बैठकों और केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकातों के दौरान किसानों के हित में अनेक सुझाव और मांगें रखने के दावे किए जा रहे थे।
उन्होंने पूछा कि आखिर उन सुझावों और मांगों में से कितनों को गंभीरता से लिया गया और कितनों को वर्ष 2026-27 की नई अफीम नीति में शामिल किया गया?
जाजू ने कहा कि नई नीति सामने आने के बाद अब जनप्रतिनिधियों को किसानों के समक्ष स्पष्ट करना चाहिए कि उनके प्रयासों से अफीम उत्पादकों को वास्तविक रूप से क्या राहत मिली है।