उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित 15 से अधिक प्राचीन मंदिरों के जीर्णाेद्धार की तैयारी की जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा इस परियोजना पर करीब 10 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। ऐतिहासिक मंदिरों की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए उन्हें नया स्वरूप देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्य के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण ने टेंडर जारी किया है। परियोजना में संबंधित विशेषज्ञों की रिपोर्ट और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर जीर्णाेद्धार किया जाएगा, ताकि प्राचीन मंदिरों के पुरातात्विक महत्व और मूल स्वरूप को नुकसान न पहुंचे।
जीर्णाेद्धार के दौरान पारंपरिक निर्माण पद्धतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत गुड़, मेथी दाना, उड़द और चूने जैसी पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग किया जाएगा। वहीं, सदियों पुराने पत्थरों की सफाई के लिए विशेष स्टीम पद्धति अपनाई जाएगी, जिससे ऐतिहासिक संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए उनकी साफ-सफाई की जा सके।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक तकनीक से किए जाने वाले निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन को ध्यान में रखते हुए काम किया जाएगा। इस पूरी परियोजना को लगभग एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अनुसार, अक्टूबर 2027 से पहले जीर्णाेद्धार कार्य पूरा करने की तैयारी है।
गौरतलब है कि महाकाल मंदिर परिसर के प्राचीन मंदिरों का इससे पहले वर्ष 2004 में जीर्णाेद्धार किया गया था। अब एक बार फिर इन ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित और व्यवस्थित करने की पहल की जा रही है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद महाकाल मंदिर परिसर के प्राचीन मंदिरों की सुंदरता निखरने के साथ उनकी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए ये प्राचीन मंदिर परिसर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेंगे।