मंदसौर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित सुरक्षित बचपन अभियान का समापन जिला न्यायालय परिसर में बाल सृजन प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक और विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के आयोजन के साथ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनीष कुमार मिश्रा, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय प्रिया शर्मा तथा न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने फीता काटकर किया।
इस अवसर पर जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष रघुवीर सिंह पवार, न्यायाधीशगण, एनसीसी के छात्र-छात्राएं, अधिवक्तागण और पैरालीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में बच्चों की रचनात्मकता ने खींचा ध्यान-
प्रदर्शनी में ‘अपना घर’ में निवासरत छात्राओं द्वारा अपने हाथों से बनाए गए दीपों को आकर्षक रंगों और विभिन्न डिजाइनों से सजाकर प्रदर्शित किया गया। छात्राओं द्वारा तैयार किए गए दीपों और हस्तनिर्मित सामग्री का विक्रय भी किया गया। इसके अलावा सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आयोजित चित्रकला एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई रचनाओं को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया। इस पहल के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता और प्रतिभा को प्रोत्साहित किया गया।
नुक्कड़ नाटक से बताए बाल अधिकार और सुरक्षा के उपाय-
अभियान के तहत सांदीपनि विद्यालय, साबाखेड़ा में जवाहरलाल नेहरू विधि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। इनके माध्यम से बाल शोषण से बचाव, बच्चों के अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी रोचक एवं प्रभावी तरीके से दी गई।
बच्चों को शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए किया प्रेरित-
कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सिद्धार्थ तिवारी तथा जिला न्यायाधीश मंजू सिंह ने अपने उद्बोधन में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बच्चों को किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने और जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता कर बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
जिलेभर में आयोजित किए गए जागरूकता कार्यक्रम-
उल्लेखनीय है कि सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में बाल सुरक्षा, बाल अधिकार, बाल शोषण से बचाव, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, साइबर सुरक्षा तथा बच्चों के संरक्षण से जुड़े विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान में न्यायिक अधिकारियों, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियान का मुख्य संदेश रहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त बचपन उपलब्ध कराना समाज के हर व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।