सरवानिया महाराज। क्षेत्र में बिजली व्यवस्था सुधारने और लो वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से विद्युत ग्रिड का अपग्रेडेशन किया गया, लेकिन नया पीटीआर (पावर ट्रांसफार्मर) लगाने के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिल पाई है। पिछले 10 से 15 दिनों से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। इसके चलते किसानों के सिंचाई पंप ठीक से नहीं चल पा रहे हैं और खेतों में खड़ी फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने विद्युत ग्रिड पर नया पीटीआर स्थापित कर क्षमता बढ़ाने की पहल की थी। उम्मीद जताई गई थी कि इससे क्षेत्र में वोल्टेज की समस्या और लोड शेडिंग से राहत मिलेगी, लेकिन किसानों का कहना है कि अपग्रेडेशन के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ। कम वोल्टेज के कारण सिंचाई मोटरें ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं और किसान अपनी फसलों को समय पर पानी नहीं दे पा रहे हैं।
राहत के दावे के बीच बढ़ी किसानों की परेशानी
जानकारी के अनुसार, विद्युत ग्रिड पर पहले 5-5 एमवीए क्षमता के दो पीटीआर कार्यरत थे। विभाग ने इनमें से एक पीटीआर हटाकर उसकी जगह 10 एमवीए क्षमता का नया पीटीआर स्थापित किया। इस बदलाव का उद्देश्य विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाना और उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज एवं बिजली कटौती की समस्या से राहत दिलाना बताया गया था।
हालांकि, किसानों का आरोप है कि नया पीटीआर लगने के बाद भी वोल्टेज की समस्या दूर नहीं हुई। पिछले कई दिनों से सिंचाई पंप पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण बंद पड़े हैं या ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे खेतों में खड़ी फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
किसानों में आक्रोश, जल्द समाधान की मांग
क्षेत्र के किसानों ने बिजली कंपनी की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ग्रिड अपग्रेडेशन के बाद उन्हें बेहतर बिजली आपूर्ति की उम्मीद थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों का कहना है कि एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने से फसलों को समय पर पानी देना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने विभाग से जल्द स्थायी समाधान करने की मांग की है।
अधिकारियों का जवाब- कैपेसिटर सिस्टम अपग्रेड करने का काम जारी
मामले में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सहायक यंत्री शशिकांत मईड़ा से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि नया पीटीआर लगाने के बाद कैपेसिटर सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के चलते वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उज्जैन से नया कैपेसिटर सिस्टम मंगवाकर ग्रिड पर स्थापित कर दिया गया है। फिलहाल कुछ तकनीकी कार्य शेष है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद वोल्टेज की समस्या दूर होने की उम्मीद है।
सवालों के घेरे में बिजली व्यवस्था, नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
अब सवाल यह है कि ग्रिड अपग्रेडेशन के बावजूद किसानों को लो वोल्टेज की समस्या से राहत क्यों नहीं मिल पा रही है? यदि तकनीकी सुधार का काम पहले से तय था, तो इसे समय पर पूरा क्यों नहीं किया गया? सबसे बड़ी चिंता किसानों की फसलों को लेकर है। सिंचाई में देरी से होने वाले संभावित नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल किसान जल्द तकनीकी कार्य पूरा कर पर्याप्त वोल्टेज के साथ नियमित बिजली आपूर्ति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।