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November 18, 2022, 12:34 pm
BIG NEWS : देश-समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाले साहित्य का प्रसार हो- राज्यपाल  पटेल, दुनिया में समस्त विज्ञान का स्रोत भारत का प्राचीन विज्ञान- मंत्री सखलेचा, टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग-2022 उद्घाटित, पढ़े खबर 

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भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भावी पीढ़ी को देश और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाले साहित्य का प्रसार किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय गौरव, आजादी के संघर्ष, अमर वीर-वीरांगनाओं और पर्यावरण चेतना के प्रति सजग बनाने वाले साहित्य का पुस्तकालयों में संकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ही साहित्य, कला और पर्यावरण आदि विभिन्न विषय पर पुस्तकों की उपलब्धता पुस्तकालयों में होनी चाहिए। राज्यपाल पटेल 17 नवंबर को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव 2022 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि कलात्मकता की शक्ति अद्भुत होती है। दिल, दिमाग और आत्म-शक्ति के समन्वय से ही रचना का सृजन होता है। इसके लिए किसी साधन-संसाधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने डिण्डोरी जिले की यात्रा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ दोनों हाथों से वंचित बालिका पैरों से अद्भुत चित्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि कलात्मक प्रतिभा और शक्ति व्यक्तित्व को विशिष्ट स्वरूप देती है। सांस्कृतिक आयोजनों से पारंपरिक कलाओं को निरंतरता, मजबूती मिलती और नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित होती है।

सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने विश्व रंग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में समस्त विज्ञान का स्रोत भारत का प्राचीन विज्ञान है। जिसका अलग-अलग रूपों में आज विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वरंग हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच वैचारिक संवाद तथा सांस्कृतिक आपसदारी का विराट समागम है।

सखलेचा ने कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल की पहल पर टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र तथा वनमाली सृजन पीठ के मुख्य संयोजन में परिकल्पित इस अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला महोत्सव में जनजाति कला, सिनेमा, पत्रकारिता व पर्यावरण सहित अनेक विषयों का अनूठा मंच हो रहा है, जिसमें आदिवासी साहित्य एवं कला प्रदर्शनी, फिल्म प्रदर्शन, भारतीय ऋषि वैज्ञानिकों की प्रदर्शनी शामिल है। उन्होंने कहा कि विश्वरंग वास्तव में भारतीय संस्कृति का वैश्विक मंच है और ऐसे अनूठे कार्यक्रम के माध्यम से टैगोर विश्वविद्यालय कीर्तिमान रच रहा है। 

कार्यक्रम में राज्यपाल पटेल द्वारा हिन्दी के डॉ नंद किशोर आचार्य, गुजराती के जयंत परमार, मराठी के शरण कुमार लिम्बाले, मलयालम के ए अनविंदाक्षन, उड़िया की प्रतिभा राय, अंग्रेजी की सुकृता पॉल, संस्कृत के डॉ राधावल्लभ त्रिपाठी को विश्वरंग अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया। राज्यपाल पटेल को राजभवन की अधिकारी शिल्पी दिवाकर द्वारा उनकी रचना प्रेम सेतु की गिलहरी की प्रथम प्रति भेंट की गयी। विश्वरंग के अवसर पर प्रकाशित विश्व रंग फोल्डर, विश्व में हिन्दी रिपोर्ट, विश्वरंग स्पीकर प्रोफाइल बुकलेट, विश्वरंग पुस्तक यात्रा रिपोर्ट और बाल कविता कोश भेंट किये गए। रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने स्वागत उद्बोधन में विश्व रंग के आयोजन के संबंध में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिन्दी और भारतीय भाषाओं में परस्पर रिश्ता कायम करने की पहल विश्वरंग का आयोजन है। उन्होंने विश्वरंग के दौरान की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी दी।

राज्यपाल मंगूभाई पटेल को उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल पटेल एवं मंत्री सखलेचा का शॉल और गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिकृति स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट कर सम्मान किया गया। 
 

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